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CBSE Class X
Hindi
Question Paper
From previous CBSE Board Exam questions
Code: N9LEMZQuestions: 15Maximum Marks: 30Generated: 2026-06-15 13:05
Selections used
SourcePrevious-year board
SubjectHindi
Lessonsप्रहलाद अग्रवाल – तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेन्द्र
Questions selected15
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Q1. [1]
पठित गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए : उत्कृष्ट होते हुए भी 'तीसरी कसम' फिल्म सिनेमाघरों में क्यों नहीं चली ?
  1. (a) फिल्म की संवेदना का प्रचार न होने के कारण
  2. (b) अच्छे गीतों के अभाव के कारण
  3. (c) फिल्म में कमजोर अभिनय के कारण
  4. (d) फिल्म की कमजोर पटकथा के कारण
Previously asked in: 2023 4/6/1 Q10 (ii)
Q2. [1]
पठित गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर उचित विकल्प चुनकर दीजिए : 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ के आधार पर लिखिए कि भारतीय फिल्मों की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है ?
  1. (a) लोक तत्त्व का अभाव
  2. (b) लोक कला का अभाव
  3. (c) लोक संगीत का अभाव
  4. (d) लोक कल्याण का अभाव
Previously asked in: 2023 4/1/1 Q10 (i)
Q3. [3]
'तीसरी कसम फिल्म नहीं, सैल्यूलाइड पर लिखी कविता थी ।' पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए ।
Previously asked in: 2024 4/2/1 Q11 (ख)
Q4. [1]
गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए : 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए कि फिल्मों में त्रासद स्थितियों की भी प्रशंसा (ग्लोरिफाई) क्यों की जाती है ?
  1. A अधिक से अधिक धन कमाने हेतु
  2. B दर्शकों का मनोरंजन करने हेतु
  3. C अधिकाधिक लोकप्रियता पाने हेतु
  4. D दर्शकों का भावात्मक शोषण करने हेतु
Previously asked in: 2024 4/2/1 Q10 (i)
Q5. [2]
शैलेंद्र की फिल्म की कहानी सुनकर राजकपूर ने क्या प्रतिक्रिया प्रकट की ?
Previously asked in: 2025 4/5/1 Q8 (IV)
Q6. [2]
'तीसरी क़सम' फ़िल्म अभिनय के दृष्टिकोण से राजकपूर के जीवन की सबसे सुंदर फ़िल्म थी, सिद्ध कीजिए।
Previously asked in: 2025 4/3/1 Q8 (ग)
Q7. [2]
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित 'तीसरी क़सम' फ़िल्म को प्रदर्शित करने के लिए वितरक क्यों नहीं मिल रहे थे ?
Previously asked in: 2025 4/2/1 Q8 (घ)
Q8. [2]
तीसरी क़सम फ़िल्म में राजकपूर अभिनय नहीं करता । वह हीरामन के साथ एकाकार हो गया है । 'तीसरी क़सम के शिल्पकार शैलेंद्र' – पाठ के संदर्भ में कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
Previously asked in: 2025 4/1/1 Q8 (ग)
Q9. [2]
'व्यथा आदमी को पराजित ही नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश भी देती है।' – 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ से उद्धृत पंक्ति के पक्ष या विपक्ष में अपना मत स्पष्ट कीजिए।
Previously asked in: 2026 4/2/1 Q10 (iv)
Q10. [3]
'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ से लिए गए कथन — "ऐसा नहीं कि शैलेंद्र बीस सालों तक फ़िल्म इंडस्ट्री में रहते हुए भी वहाँ के तौर-तरीकों से नावाकिफ़ थे, परंतु उनमें उलझकर वे अपनी आदमियत नहीं खो सके थे ।" — के संदर्भ में शैलेंद्र की विशेषताएँ लिखिए ।
Previously asked in: 2023 4/2/1 Q11 (ग)
Q11. [1]
पठित गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर के लिए सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : 'तीसरी कसम' फ़िल्म निर्माण के पीछे शैलेन्द्र का क्या उद्देश्य था ?
  1. (a) आत्म संतुष्टि के सुख की कामना
  2. (b) अपार संपत्ति के सुख की कामना
  3. (c) अपार यश के सुख की कामना
  4. (d) साहित्य संरक्षण के सुख की कामना
Previously asked in: 2023 4/2/1 Q10 (i)
Q12. [3]
'शैलेंद्र' से फ़िल्म की कहानी सुनकर राजकपूर ने अपनी प्रतिक्रिया कैसे व्यक्त की और सच्ची दोस्ती का निर्वाह किस प्रकार किया ? 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ के आधार पर लिखिए ।
Previously asked in: 2024 4/5/1 Q11 (ख)
Q13. [3]
फिल्मकार शैलेंद्र के बारे में लेखक ने क्या कहा है ? उन कथनों से आपके मन में शैलेंद्र की कौन-सी छवि उभरती है ?
Previously asked in: 2024 4/4/1 Q11 (ख)
Q14. [2]
शैलेंद्र फ़िल्म की असफलता के खतरों को पहले से जानते थे फिर भी उन्होंने 'तीसरी कसम' फ़िल्म क्यों बनाई ? 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ के आधार पर उत्तर लिखिए ।
Previously asked in: 2026 4/5/1 Q8 (iv)
Q15. [2]
'व्यावसायिक दृष्टि से एक असफल फ़िल्म होते हुए भी 'तीसरी कसम' एक सफल फ़िल्म थी ।' पाठ के संदर्भ में सिद्ध कीजिए ।
Previously asked in: 2026 4/4/1 Q8 (iii)
CBSE Class X
Hindi
Answer Key
From previous CBSE Board Exam questions
Code: N9LEMZQuestions: 15Maximum Marks: 30Generated: 2026-06-15 13:05
Q1. [1]
पठित गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए : उत्कृष्ट होते हुए भी 'तीसरी कसम' फिल्म सिनेमाघरों में क्यों नहीं चली ?
  1. (a) फिल्म की संवेदना का प्रचार न होने के कारण
  2. (b) अच्छे गीतों के अभाव के कारण
  3. (c) फिल्म में कमजोर अभिनय के कारण
  4. (d) फिल्म की कमजोर पटकथा के कारण
Previously asked in: 2023 4/6/1 Q10 (ii)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:17 · grounding rag
Model Answer

(a) फिल्म की संवेदना का प्रचार न होने के कारण

Explanation

The passage directly states: "दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने वाले की समझ से परे थी।" The film's deep emotional sensitivity could not be marketed by commercial distributors, so it failed at the box office — not due to poor acting, songs, or screenplay.

Q2. [1]
पठित गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर उचित विकल्प चुनकर दीजिए : 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ के आधार पर लिखिए कि भारतीय फिल्मों की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है ?
  1. (a) लोक तत्त्व का अभाव
  2. (b) लोक कला का अभाव
  3. (c) लोक संगीत का अभाव
  4. (d) लोक कल्याण का अभाव
Previously asked in: 2023 4/1/1 Q10 (i)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:17 · grounding rag
Model Answer

सही उत्तर है: (a) लोक तत्त्व का अभाव

पाठ के अनुसार, भारतीय फिल्मों की सबसे बड़ी कमजोरी लोक तत्त्व का अभाव है।

Explanation

'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ में लेखक ने स्पष्ट किया है कि भारतीय फ़िल्मों में लोक तत्त्व की कमी सबसे बड़ी कमज़ोरी है। MCQ में केवल सही विकल्प पहचानना और उसे लिखना पर्याप्त है।

Q3. [3]
'तीसरी कसम फिल्म नहीं, सैल्यूलाइड पर लिखी कविता थी ।' पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए ।
Previously asked in: 2024 4/2/1 Q11 (ख)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:17 · grounding rag
Model Answer

'तीसरी कसम' को सेल्यूलाइड पर लिखी कविता इसलिए कहा गया क्योंकि:

इस प्रकार यह फ़िल्म नहीं, चलचित्र के माध्यम पर उकेरी गई एक काव्य-रचना थी।

Source: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र, पाठ-11

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Explanation

परीक्षक यहाँ चाहते हैं कि छात्र कम-से-कम 3-4 ठोस कारण दे जो फ़िल्म की काव्यात्मकता सिद्ध करें — साहित्यिक आधार, गीतों की भाव-प्रवणता, निर्माता का कवि-हृदय, और व्यावसायिकता से परे संवेदना। केवल एक-दो पंक्तियाँ लिखने पर अंक कटेंगे। 'सिद्ध कीजिए' वाले प्रश्न में बिंदुवार उत्तर देना उचित रहता है।

Q4. [1]
गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए : 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ के आधार पर उत्तर दीजिए कि फिल्मों में त्रासद स्थितियों की भी प्रशंसा (ग्लोरिफाई) क्यों की जाती है ?
  1. A अधिक से अधिक धन कमाने हेतु
  2. B दर्शकों का मनोरंजन करने हेतु
  3. C अधिकाधिक लोकप्रियता पाने हेतु
  4. D दर्शकों का भावात्मक शोषण करने हेतु
Previously asked in: 2024 4/2/1 Q10 (i)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:17 · grounding rag
Model Answer

उत्तर: (D) दर्शकों का भावात्मक शोषण करने हेतु

फिल्मों में त्रासद स्थितियों को ग्लोरिफाई इसलिए किया जाता है ताकि दर्शकों का भावात्मक शोषण किया जा सके।

Explanation

The text (लिखित section, question 4) directly asks why tragic situations are glorified in films — the lesson's answer is that filmmakers exploit the audience's emotions (भावात्मक शोषण) rather than genuinely portraying suffering. Shailendra opposed this tendency. Option D is the textbook-correct answer; options A and C are partial commercial reasons not stated as the specific answer in the chapter.

Q5. [2]
शैलेंद्र की फिल्म की कहानी सुनकर राजकपूर ने क्या प्रतिक्रिया प्रकट की ?
Previously asked in: 2025 4/5/1 Q8 (IV)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:17 · grounding rag
Model Answer

शैलेंद्र की फिल्म 'तीसरी कसम' की कहानी सुनकर राजकपूर ने कहा कि यह फिल्म कभी नहीं चलेगी और उन्होंने शैलेंद्र को असफलता के खतरों से आगाह किया। यह सुनकर शैलेंद्र का चेहरा मुरझा गया, फिर भी उन्होंने फिल्म बनाने का निर्णय नहीं बदला।

Source: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र, प्रश्न-अभ्यास

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Explanation
Q6. [2]
'तीसरी क़सम' फ़िल्म अभिनय के दृष्टिकोण से राजकपूर के जीवन की सबसे सुंदर फ़िल्म थी, सिद्ध कीजिए।
Previously asked in: 2025 4/3/1 Q8 (ग)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:17 · grounding rag
Model Answer

राजकपूर ने 'तीसरी कसम' में हीरामन गाड़ीवान का अभिनय इस तरह किया कि उनका महिमामय व्यक्तित्व हीरामन की आत्मा में पूरी तरह समा गया। फ़िल्म समीक्षक मानते थे कि राजकपूर अपनी भावनाएँ आँखों से व्यक्त करने में सिद्धहस्त थे और इस फ़िल्म में उन्होंने यही किया — बिना अतिरंजना के, सहज और सच्चा अभिनय।

Source: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र, पाठ 11

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Explanation
Q7. [2]
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित 'तीसरी क़सम' फ़िल्म को प्रदर्शित करने के लिए वितरक क्यों नहीं मिल रहे थे ?
Previously asked in: 2025 4/2/1 Q8 (घ)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:17 · grounding rag
Model Answer

'तीसरी कसम' एक संवेदनशील, कलात्मक और साहित्यिक फिल्म थी। इसकी संवेदना व्यावसायिक दृष्टि से सोचने वाले वितरकों की समझ से परे थी। वितरक केवल मुनाफे को ध्यान में रखते थे और उन्हें इस फिल्म में व्यावसायिक सफलता की संभावना नज़र नहीं आती थी।

Source: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र, प्रश्न-अभ्यास

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Explanation
Q8. [2]
तीसरी क़सम फ़िल्म में राजकपूर अभिनय नहीं करता । वह हीरामन के साथ एकाकार हो गया है । 'तीसरी क़सम के शिल्पकार शैलेंद्र' – पाठ के संदर्भ में कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
Previously asked in: 2025 4/1/1 Q8 (ग)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:17 · grounding rag
Model Answer

इस कथन का आशय है कि राजकपूर ने हीरामन का अभिनय नहीं किया, बल्कि वे पूरी तरह हीरामन के चरित्र में ढल गए। उनका महिमामय 'शोमैन' व्यक्तित्व पूरी तरह गायब हो गया और एक सीधे-सादे, भोले गाड़ीवान हीरामन की आत्मा उनमें उतर गई। यह उनके फ़िल्मी जीवन की सर्वोत्कृष्ट अभिनय-उपलब्धि थी।

Source: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र, पाठ प्रवेश एवं लिखित (ख)

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Explanation
Q9. [2]
'व्यथा आदमी को पराजित ही नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश भी देती है।' – 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ से उद्धृत पंक्ति के पक्ष या विपक्ष में अपना मत स्पष्ट कीजिए।
Previously asked in: 2026 4/2/1 Q10 (iv)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:16 · grounding rag
Model Answer

पक्ष में मत:

मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ। शैलेंद्र स्वयं इसके उदाहरण हैं — उन्होंने जीवन में अनेक कष्ट झेले, परंतु व्यथा ने उन्हें तोड़ा नहीं। बल्कि उसी पीड़ा से प्रेरणा लेकर उन्होंने भाव-प्रवण गीत और 'तीसरी कसम' जैसी कालजयी फ़िल्म बनाई। व्यथा मनुष्य को संवेदनशील बनाती है और आगे बढ़ने की शक्ति देती है।

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Explanation
Q10. [3]
'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ से लिए गए कथन — "ऐसा नहीं कि शैलेंद्र बीस सालों तक फ़िल्म इंडस्ट्री में रहते हुए भी वहाँ के तौर-तरीकों से नावाकिफ़ थे, परंतु उनमें उलझकर वे अपनी आदमियत नहीं खो सके थे ।" — के संदर्भ में शैलेंद्र की विशेषताएँ लिखिए ।
Previously asked in: 2023 4/2/1 Q11 (ग)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:16 · grounding rag
Model Answer

दिए गए कथन के संदर्भ में शैलेंद्र की निम्नलिखित विशेषताएँ उभरती हैं:

  1. फ़िल्म इंडस्ट्री के तौर-तरीकों की जानकारी — शैलेंद्र बीस वर्षों के अनुभव के कारण फ़िल्म जगत की व्यावसायिक चालाकियों से भलीभाँति परिचित थे।
  1. आदर्शवादी व्यक्तित्व — इंडस्ट्री में रहते हुए भी वे उसकी स्वार्थपरता और मक्कारी में नहीं उलझे; उन्होंने अपनी मानवीयता और ईमानदारी को बनाए रखा।
  1. आत्म-संतुष्टि को प्राथमिकता — उन्हें धन और यश से अधिक आत्म-संतुष्टि की चाह थी, इसलिए उन्होंने व्यावसायिक दबाव में झुककर अपनी 'आदमियत' नहीं खोई।

Source: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र, Chapter 11

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Explanation
Q11. [1]
पठित गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर के लिए सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : 'तीसरी कसम' फ़िल्म निर्माण के पीछे शैलेन्द्र का क्या उद्देश्य था ?
  1. (a) आत्म संतुष्टि के सुख की कामना
  2. (b) अपार संपत्ति के सुख की कामना
  3. (c) अपार यश के सुख की कामना
  4. (d) साहित्य संरक्षण के सुख की कामना
Previously asked in: 2023 4/2/1 Q10 (i)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:16 · grounding rag
Model Answer

(a) आत्म संतुष्टि के सुख की कामना

Source: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र, लिखित (ग)-1

Explanation

पाठ में स्पष्ट उल्लेख है — "वह एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी।" अतः (a) सही विकल्प है।

Q12. [3]
'शैलेंद्र' से फ़िल्म की कहानी सुनकर राजकपूर ने अपनी प्रतिक्रिया कैसे व्यक्त की और सच्ची दोस्ती का निर्वाह किस प्रकार किया ? 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ के आधार पर लिखिए ।
Previously asked in: 2024 4/5/1 Q11 (ख)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:16 · grounding rag
Model Answer

जब शैलेंद्र ने राजकपूर को 'तीसरी कसम' फ़िल्म की कहानी सुनाई, तो राजकपूर ने तुरंत यह स्वीकार कर लिया। उन्होंने एक सच्चे मित्र की तरह शैलेंद्र को फ़िल्म की व्यावसायिक असफलता के खतरों से पहले ही आगाह किया और स्पष्ट किया कि यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं होगी। इस प्रकार उन्होंने सच्ची दोस्ती का निर्वाह किया — न केवल मित्र की भावनाओं का सम्मान करते हुए फ़िल्म में काम किया, बल्कि अपना पारिश्रमिक भी न्यूनतम लिया, ताकि मित्र पर आर्थिक बोझ कम पड़े।

Source: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र, Chapter 11

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Explanation
Q13. [3]
फिल्मकार शैलेंद्र के बारे में लेखक ने क्या कहा है ? उन कथनों से आपके मन में शैलेंद्र की कौन-सी छवि उभरती है ?
Previously asked in: 2024 4/4/1 Q11 (ख)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:16 · grounding rag
Model Answer

लेखक ने शैलेंद्र के बारे में कहा है कि वे एक आदर्शवादी और भावुक कवि थे। उन्हें धन-संपत्ति और यश की कामना नहीं थी, बल्कि आत्म-संतुष्टि ही उनका लक्ष्य था। वे दर्शकों की रुचि का परिष्कार करना कलाकार का कर्तव्य मानते थे और उथलेपन को कभी नहीं थोपना चाहते थे।

इन कथनों से शैलेंद्र की छवि एक संवेदनशील, सिद्धांतवादी और निःस्वार्थ कवि-फिल्मकार की उभरती है जो व्यावसायिक लाभ से ऊपर उठकर कला की सच्चाई और मानवीय भावनाओं को प्राथमिकता देते थे।

Source: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र, पाठ 11

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Explanation
Q14. [2]
शैलेंद्र फ़िल्म की असफलता के खतरों को पहले से जानते थे फिर भी उन्होंने 'तीसरी कसम' फ़िल्म क्यों बनाई ? 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पाठ के आधार पर उत्तर लिखिए ।
Previously asked in: 2026 4/5/1 Q8 (iv)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:16 · grounding rag
Model Answer

शैलेंद्र एक आदर्शवादी कवि-हृदय थे जिन्हें धन-यश की नहीं, बल्कि आत्म-संतुष्टि की चाह थी। वे फणीश्वर नाथ रेणु की इस संवेदनशील कृति को परदे पर उतारकर दर्शकों की रुचि का परिष्कार करना चाहते थे। उनके लिए यह फ़िल्म व्यापार नहीं, एक काव्यात्मक अभिव्यक्ति थी।

Source: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र, Chapter 11

---

Explanation
Q15. [2]
'व्यावसायिक दृष्टि से एक असफल फ़िल्म होते हुए भी 'तीसरी कसम' एक सफल फ़िल्म थी ।' पाठ के संदर्भ में सिद्ध कीजिए ।
Previously asked in: 2026 4/4/1 Q8 (iii)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:16 · grounding rag
Model Answer

'तीसरी कसम' व्यावसायिक दृष्टि से असफल रही क्योंकि इसे खरीददार नहीं मिले और शैलेंद्र को भारी आर्थिक हानि उठानी पड़ी। किंतु कलात्मक दृष्टि से यह अत्यंत सफल थी — इसे राष्ट्रपति स्वर्ण पदक मिला, इसे 'सेल्युलाइड पर लिखी कविता' कहा गया और इसने साहित्यिक रचना के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया।

Source: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र, प्रश्न-अभ्यास

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Explanation
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