Code: U3TR2CQuestions: 18Maximum Marks: 51Generated: 2026-06-15 13:05
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SubjectHindi
Lessonsमैथिलीशरण गुप्त – मनुष्यता
Questions selected18
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Q1. [2]
‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने सब को साथ चलने की प्रेरणा क्यों दी है ? इससे समाज को क्या लाभ हो सकता है ? तर्क सहित उत्तर दीजिए ।
Previously asked in: 2022 4/4/1 Q1 (क)
Q2. [3]
'मनुष्यता' कविता में कवि ने कैसे जीवन को व्यर्थ बताया है, और क्यों ?
Previously asked in: 2023 4/6/1 Q12 (ख)
Q3. [3]
'मनुष्यता' कविता के संदर्भ में लिखिए कि उदार लोगों के प्रति संसार कैसा आचरण करता है ?
Previously asked in: 2023 4/1/1 Q12 (ग)
Q4. [1]
काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कर लिखिए : 'मनुष्यता' कविता के अनुसार संसार में मनुष्यों की स्थिति में भिन्नता का कारण है –
- A भौगोलिक परिस्थितियाँ
- B आर्थिक परिस्थितियाँ
- C मनुष्य द्वारा किए गए उसके कर्म
- D मनुष्य द्वारा प्राप्त किया गया ज्ञान
Previously asked in: 2024 4/3/1 Q8 (i)
Q5. [1]
काव्य-खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए : 'मनुष्यता' कविता से उद्धृत – "तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे" – पंक्ति का भाव है –
- A सामर्थ्य के अनुसार दूसरों की रक्षा करनी चाहिए ।
- B मानव जीवन की सार्थकता सबको साथ लेकर चलने में है ।
- C अपनी ही उन्नति में संतुष्ट नहीं रहना चाहिए ।
- D सामर्थ्य के अनुसार तैरने वाले व्यक्ति की रक्षा करनी चाहिए ।
Previously asked in: 2024 4/2/1 Q8 (i)
Q6. [2]
'मनुष्यता' कविता में कवि लोगों से किस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा करता है ? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए ।
Previously asked in: 2025 4/6/1 Q10 (III)
Q7. [2]
पशु प्रवृत्ति मनुष्य द्वारा अपनाने योग्य है अथवा नहीं ? 'मनुष्यता' कविता के आधार पर कारण सहित उत्तर दीजिए ।
Previously asked in: 2025 4/5/1 Q10 (II)
Q8. [2]
किसी भी देश के विकास के लिए उदार व्यक्तियों की आवश्यकता होती है, कैसे? 'मनुष्यता' कविता के आधार पर लिखिए।
Previously asked in: 2025 4/4/1 Q10 (ii)
Q9. [2]
'मनुष्यता' कविता में 'अभीष्ट मार्ग' पर आगे बढ़ते हुए कवि ने किस बात का ध्यान रखने की बात कही है ?
Previously asked in: 2025 4/3/1 Q10 (ख)
Q10. [7]
भोजन की बर्बादी से तात्पर्य उस भोजन से है जिसे खाया नहीं जाता और फेंक दिया जाता है। अनेक लोग अधिक मात्रा में भोजन खरीदते हैं और समाप्ति तिथि के बाद खोले बिना ही उसे फेंक दिया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन द्वारा प्रकाशित आँकड़ों के अनुसार दुनियाभर में हर साल 1-3 अरब टन भोजन बर्बाद हो जाता है। यह आँकड़ा मानव उपयोग के लिए बनाए गए सभी खाद्य पदार्थों का एक-तिहाई है। दुनिया भर में लगभग एक अरब लोग कुपोषित या भूखे हैं। हम जिस भोजन को बर्बाद करने की प्रवृत्ति रखते हैं उसका केवल एक-चौथाई हिस्सा ही उन्हें ठीक से खिलाने में मदद कर सकता है। हमारे ग्रह पर उभर रही इस बड़ी समस्या का समाधान माँग के साथ खाद्य उत्पादन को संतुलित करना, खाद्य संचयन, भंडारण, प्रसंस्करण और वितरण प्रणालियों को बेहतर बनाना है। बर्बादी को सीमित करने के लिए अत्यधिक बिक्री को भी कम किया जा सकता है। प्रत्येक व्यक्ति एक योजना के साथ भोजन खरीदे और तैयार करे ताकि कम भोजन बर्बाद हो। खाद्य पुनर्चक्रण सबसे ज्ञात समाधानों में से एक है।
भोजन की बर्बादी पृथ्वी ग्रह पर सबसे बड़ी समस्याओं में से एक रही है जिसमें पृथ्वी को काफी हद तक प्रभावित किया है। इस समस्या को नियंत्रित कर आने वाली पीढ़ियों को भविष्य में होने वाली बड़ी समस्याओं जैसे ग्लोबल वार्मिंग और ग्रीन हाउस गैसों की पहुँच के कारण जलवायु परिवर्तन से बचा सकती है। खाद्य प्रणालियों की दक्षता में वृद्धि और भोजन की बर्बादी में कमी लाने के लिए नवाचार टेक्नोलॉजी व बुनियादी ढाँचे के संसाधनों में निवेश की आवश्यकता है। बर्बाद भोजन को कूड़ा खाद के रूप में इस्तेमाल करके भी पर्यावरण पर इसके दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए :
- (i) इस गद्यांश में लेखक की चिंता का विषय है : [1]
- (A) वैश्विक स्तर पर बढ़ता प्रदूषण का स्तर
- (B) वैश्विक स्तर पर लोगों का कुपोषित होना
- (C) विश्व स्तर पर होने वाली भोजन की बर्बादी
- (D) विश्व की एक-तिहाई आबादी का भूखे रहना
- (ii) मानवीयता के साथ-साथ भोजन की बर्बादी प्रभावित करती है : [1]
- (A) पर्यावरण को
- (B) जीव-जंतुओं को
- (C) अर्थव्यवस्था को
- (D) समाज को
- (iii) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यान से पढ़िए और सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए :
कथन : भोजन की बर्बादी जलवायु परिवर्तन का भी कारक है।
कारण : भूमि पर फेंका गया भोजन तीव्र मात्रा में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन करता है। [1]
- (A) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
- (B) कारण सही है, लेकिन कथन ग़लत है।
- (C) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है।
- (D) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv) भोजन की बर्बादी पर्यावरण को किस प्रकार क्षति पहुँचाती है ? इसे किस प्रकार कम किया जा सकता है ? [2]
- (v) भोजन की बर्बादी से आप क्या समझते हैं और इसके क्या कारण हैं ? [2]
Previously asked in: 2025 4/3/1 Q2
Q11. [2]
'मनुष्यता' कविता के संदर्भ में लिखिए कि पशु-प्रवृत्ति क्या है । पशु-प्रवृत्ति मानव के लिए निंदनीय क्यों है ?
Previously asked in: 2025 4/2/1 Q10 (ख)
Q12. [5]
चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए ।
घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी ।
तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।
निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्पों का चयन करके लिखिए :
- (i) मनुष्य की वास्तविक सफलता क्या है ? [1]
- (A) सिर्फ स्वयं का उत्थान
- (B) सिर्फ समाज का उत्थान
- (C) स्वयं के साथ समाज का उत्थान
- (D) साथ चलने वालों का उत्थान
- (ii) इच्छित मार्ग की ओर कैसे बढ़ना चाहिए ? [1]
- (A) तेज़ी के साथ
- (B) शांति के साथ
- (C) खुशी के साथ
- (D) गर्व के साथ
- (iii) जीवन-पथ पर आगे बढ़ते हुए किस बात का ध्यान रखना चाहिए ? [1]
- (A) हर तरह के लोगों के साथ मिल-जुलकर आगे बढ़ना ।
- (B) स्वयं से अधिक दूसरों के सामर्थ्य पर भरोसा करना ।
- (C) पथ में सिर्फ समान विचारधारा वाले लोगों को साथ लेना ।
- (D) भिन्न विचार रखने वालों से दूर रहने का प्रयास करना ।
- (iv) 'मानव जीवन की सार्थकता स्वयं के साथ दूसरों को भी आगे बढ़ाने में है' – यह भाव किस पंक्ति में है ? [1]
- (A) घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी
- (B) अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हो सभी
- (C) तभी समर्थ भाव है कि तारता हुए तरे
- (D) वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे
- (v) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : हर तरह के भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्र का विकास करना चाहिए ।
कारण : सम्मिलित प्रयास से हुआ विकास अस्थाई प्रकृति का होता है । [1]
- (A) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं ।
- (B) कथन ग़लत है, लेकिन कारण सही है ।
- (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है ।
- (D) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है ।
Previously asked in: 2026 4/3/1 Q9
Q13. [2]
'विचार लो कि मर्त्य हो, न मृत्यु से डरो कभी' — 'मनुष्यता' कविता से उद्धृत प्रस्तुत पंक्ति का भाव कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए ।
Previously asked in: 2022 4/1/1 Q1 (क)
Q14. [3]
'मनुष्यता' कविता के आधार पर लिखिए कि कैसा जीवन जीने वाले लोग मरकर अमर हो जाते हैं ।
Previously asked in: 2023 4/2/1 Q12 (ख)
Q15. [5]
उसी उदार की कथा सरस्वती बखानती,
उसी उदार से धरा कृतार्थ भाव मानती ।
उसी उदार की सदा सजीव कीर्ति कूजती;
तथा उसी उदार को समस्त सृष्टि पूजती ।
अखंड आत्म भाव जो असीम विश्व में भरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।।
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए :
- (i) पद्यांश के अनुसार उदार किसे माना गया है ? [1]
- (A) सभ्य व्यक्ति
- (B) परोपकारी व्यक्ति
- (C) प्रसिद्ध व्यक्ति
- (D) मिलनसार व्यक्ति
- (ii) देवी सरस्वती किसका गुणगान करती है ? [1]
- (A) संगीत का
- (B) गायकों का
- (C) सहृदयी का
- (D) ज्ञानी का
- (iii) उदार के प्रति धरती का भाव है : [1]
- (A) संवेदनशीलता
- (B) प्रेम
- (C) मित्रता
- (D) कृतज्ञता
- (iv) रिक्त स्थान के लिए उपयुक्त शब्द का चयन कीजिए : सब जगह अपने लिए न जीकर दूसरों के लिए जीने वालों की _________ गूँजती है । [1]
- (A) चहलपहल
- (B) कीर्ति
- (C) रौनक
- (D) अखंडता
- (v) "अखंड आत्म भाव जो असीम विश्व में भरे" — पंक्ति का भाव है : [1]
- (A) वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना का प्रसार करना
- (B) आध्यात्मिक विचारों को विश्व में प्रसारित करना
- (C) परमात्मा की अखंडता का उल्लेख करना
- (D) आत्मा को परमात्मा का अंश बताना
Previously asked in: 2024 4/5/1 Q7
Q16. [5]
विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी,
मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी ।
हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए,
मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए ।
वही पशु-प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।।
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए :
- (i) कवि ने ऐसा क्यों कहा कि मृत्यु से नहीं डरना चाहिए ? [1]
- (A) मृत्यु से यश प्राप्त होता है
- (B) जन्म-मरण ईश्वर के हाथ में है
- (C) मृत्यु के बाद नया शरीर मिलता है
- (D) मृत्यु तो अवश्यंभावी है
- (ii) कवि कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहता है ? [1]
- (A) बिना किसी पीड़ा के हुई मृत्यु
- (B) अपनों के हित प्राप्त होने वाली मृत्यु
- (C) महान उद्देश्य के लिए मरने वाले की मृत्यु
- (D) स्वार्थ सिद्ध करते समय हुई मृत्यु
- (iii) कैसी मृत्यु व्यर्थ है ? [1]
- (A) देश हित प्राप्त होने वाली मृत्यु
- (B) जिस मृत्यु को याद न किया जाए
- (C) दूसरों के लिए संघर्ष करते हुए प्राप्त मृत्यु
- (D) मृत्यु के बाद जो हमेशा याद रहे
- (iv) पशु प्रवृत्ति क्या है ? [1]
- (A) अपने लिए जीना-खाना
- (B) दूसरों के लिए जीना-खाना
- (C) परोपकार का भाव रखना
- (D) दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना
- (v) कौन-सा/से वाक्य पद्यांश से मेल खाता है/खाते हैं ?
I. उदार मनुष्य दूसरों के लिए जीता-मरता है ।
II. पशु प्रवृत्ति को समझ के साथ अपनाना चाहिए ।
III. मनुष्य जीवन की सार्थकता परोपकार में है ।
IV. जीवन में कुछ पाने के लिए स्वार्थी होना पड़ता है । [1]
- (A) केवल I
- (B) II, IV
- (C) I, III
- (D) II, III
Previously asked in: 2024 4/4/1 Q7
Q17. [2]
'मनुष्यता' कविता में कवि ने गर्वरहित जीवन जीने की सलाह क्यों दी है ?
Previously asked in: 2026 4/5/1 Q10 (i)
Q18. [2]
'मनुष्यता' कविता के आधार पर लिखिए कि 'अखंड आत्म भाव' रखने के क्या लाभ हैं ?
Previously asked in: 2026 4/4/1 Q10 (i)
Code: U3TR2CQuestions: 18Maximum Marks: 51Generated: 2026-06-15 13:05
Q1. [2]
‘मनुष्यता’ कविता में कवि ने सब को साथ चलने की प्रेरणा क्यों दी है ? इससे समाज को क्या लाभ हो सकता है ? तर्क सहित उत्तर दीजिए ।
Previously asked in: 2022 4/4/1 Q1 (क)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:15 · grounding rag
Model Answer
कवि ने सबको साथ चलने की प्रेरणा इसलिए दी है क्योंकि एकता और परस्परावलंब से ही मनुष्य विपत्तियों को पार कर सकता है। जब सभी मिलकर चलते हैं तो भिन्नता घटती है और आपसी सहयोग बढ़ता है।
समाज को लाभ: एकजुटता से समाज में भेदभाव समाप्त होता है, परस्पर सहायता की भावना बढ़ती है और सभी मिलकर उन्नति कर सकते हैं। "तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे" — अर्थात् दूसरों को उबारते हुए स्वयं भी उबरा जा सकता है।
Source: मनुष्यता, chapter 3
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Explanation
- यह प्रश्न कविता की अंतिम पंक्तियों — "चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए… घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी" — पर आधारित है।
- परीक्षक चाहते हैं: (1) कारण — एकता/परस्परावलंब, (2) समाज को लाभ — सहयोग, उन्नति, भेदभाव में कमी।
- "तर्क सहित" का अर्थ है कविता की पंक्ति या उदाहरण देना — एक पंक्ति उद्धृत करना पर्याप्त है।
Q2. [3]
'मनुष्यता' कविता में कवि ने कैसे जीवन को व्यर्थ बताया है, और क्यों ?
Previously asked in: 2023 4/6/1 Q12 (ख)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:15 · grounding rag
Model Answer
'मनुष्यता' कविता में कवि मैथिलीशरण गुप्त ने उस जीवन को व्यर्थ बताया है जो केवल स्वयं के लिए जिया जाए। कवि कहते हैं —
> "हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए,
> मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए।"
अर्थात् जो व्यक्ति दूसरों के लिए कुछ नहीं करता, केवल अपने स्वार्थ के लिए जीता है, उसका जीवन और मृत्यु दोनों व्यर्थ हैं। ऐसी प्रवृत्ति को कवि ने 'पशु-प्रवृत्ति' कहा है। सच्चा मनुष्य वही है जो परोपकार करे और दूसरों के लिए जिए।
Source: मनुष्यता (कविता), स्पर्श — Chapter 3
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Explanation
- परीक्षक तीन बिंदु देखते हैं: (1) किस जीवन को व्यर्थ कहा — स्वार्थी/केवल अपने लिए जीया गया जीवन, (2) कविता की पंक्ति उद्धृत करना, (3) कारण — पशु-प्रवृत्ति बनाम मनुष्यता।
- "वृथा मरे, वृथा जिए" वाली पंक्ति अवश्य लिखें — यह सीधे प्रश्न का उत्तर है।
- 'पशु-प्रवृत्ति' शब्द का प्रयोग करने से अंक मिलते हैं।
Q3. [3]
'मनुष्यता' कविता के संदर्भ में लिखिए कि उदार लोगों के प्रति संसार कैसा आचरण करता है ?
Previously asked in: 2023 4/1/1 Q12 (ग)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:15 · grounding rag
Model Answer
'मनुष्यता' कविता में कवि मैथिलीशरण गुप्त बताते हैं कि उदार व्यक्तियों के प्रति संसार अत्यंत श्रद्धापूर्ण आचरण करता है। सरस्वती उनकी कथा बखानती है, धरती उनसे कृतार्थ अनुभव करती है, उनकी कीर्ति सदा सजीव रहती है और समस्त सृष्टि उन्हें पूजती है। जो व्यक्ति परोपकार करता है, विनम्र लोकवर्ग उसके सामने झुकता है। अर्थात् उदार मनुष्य मृत्यु के बाद भी संसार में अमर रहता है।
Source: मनुष्यता (कविता), स्पर्श — Chapter 3
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Explanation
- परीक्षा में इस प्रश्न के लिए कविता की दूसरी और चौथी पंक्तियों (छंदों) से उत्तर लेना अपेक्षित है।
- मुख्य बिंदु: सरस्वती द्वारा कथा-बखान, धरती का कृतार्थ भाव, अमर कीर्ति, और समस्त सृष्टि का पूजन — ये चारों बिंदु लिखें।
- "संसार का आचरण" पूछा गया है, इसलिए यह बताना ज़रूरी है कि दुनिया उदार को कैसे सम्मान देती है, न कि उदार की विशेषताएँ।
Q4. [1]
काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कर लिखिए : 'मनुष्यता' कविता के अनुसार संसार में मनुष्यों की स्थिति में भिन्नता का कारण है –
- A भौगोलिक परिस्थितियाँ
- B आर्थिक परिस्थितियाँ
- C मनुष्य द्वारा किए गए उसके कर्म
- D मनुष्य द्वारा प्राप्त किया गया ज्ञान
Previously asked in: 2024 4/3/1 Q8 (i)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:15 · grounding rag
Model Answer
सही उत्तर: (C) मनुष्य द्वारा किए गए उसके कर्म
कविता में कहा गया है — "फलानुसार कर्म के अवश्य बाह्य भेद हैं" — अर्थात् संसार में मनुष्यों की स्थिति में भिन्नता उनके कर्मों के अनुसार होती है।
Source: मनुष्यता, chapter 3
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Explanation
कवि मैथिलीशरण गुप्त स्पष्ट करते हैं कि सभी मनुष्य एक ईश्वर की संतान हैं, अंदर से सब एक हैं — "अंतरैक्य में प्रमाणभूत वेद हैं।" जो बाहरी भेद दिखता है वह केवल कर्मों के फल के कारण है। परीक्षा में सीधे काव्य-पंक्ति उद्धृत करने से पूरा अंक मिलता है।
Q5. [1]
काव्य-खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्प को चुनकर लिखिए : 'मनुष्यता' कविता से उद्धृत – "तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे" – पंक्ति का भाव है –
- A सामर्थ्य के अनुसार दूसरों की रक्षा करनी चाहिए ।
- B मानव जीवन की सार्थकता सबको साथ लेकर चलने में है ।
- C अपनी ही उन्नति में संतुष्ट नहीं रहना चाहिए ।
- D सामर्थ्य के अनुसार तैरने वाले व्यक्ति की रक्षा करनी चाहिए ।
Previously asked in: 2024 4/2/1 Q8 (i)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:15 · grounding rag
Model Answer
उत्तर: (B) मानव जीवन की सार्थकता सबको साथ लेकर चलने में है।
पंक्ति का भाव है कि सच्ची सामर्थ्य वही है जिसमें व्यक्ति स्वयं तरते हुए दूसरों को भी तारे — अर्थात् सबको साथ लेकर चले।
Source: मनुष्यता, chapter 3
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Explanation
- पंक्ति "तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे" में कवि कहता है कि वास्तविक सामर्थ्य तभी सिद्ध होती है जब मनुष्य खुद उन्नति करते हुए दूसरों को भी ऊपर उठाए।
- Option B सटीक है क्योंकि पूरी कविता का केंद्रीय भाव "सबको साथ लेकर चलना" और परोपकार है।
- Option C आंशिक सच है लेकिन पंक्ति का पूर्ण भाव नहीं पकड़ता; Option A और D पंक्ति के भाव से मेल नहीं खाते।
Q6. [2]
'मनुष्यता' कविता में कवि लोगों से किस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा करता है ? किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए ।
Previously asked in: 2025 4/6/1 Q10 (III)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:15 · grounding rag
Model Answer
'मनुष्यता' कविता में कवि लोगों से निम्न प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा करता है:
- परोपकार व उदारता — कवि चाहता है कि मनुष्य केवल अपने लिए न जिए, बल्कि दूसरों के हित के लिए कार्य करे, जैसे रंतिदेव, दधीचि और कर्ण ने किया।
- एकता व सहानुभूति — कवि अपेक्षा करता है कि लोग आपस में मिल-जुलकर चलें, भिन्नता न बढ़ाएँ और सभी के प्रति सहानुभूति रखें, क्योंकि "मनुष्य मात्र बंधु है।"
Source: मनुष्यता (कविता), chapter 3
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Explanation
- परीक्षक दो स्पष्ट बिंदुओं की अपेक्षा रखता है — प्रत्येक के लिए 1 अंक।
- "परोपकार/उदारता" और "एकता/सहानुभूति/बंधुत्व" — ये दो केंद्रीय भाव कविता में बार-बार आते हैं; इन्हें अवश्य लिखें।
- उदाहरण (रंतिदेव, दधीचि आदि) लिखने से उत्तर अधिक प्रभावी बनता है।
Q7. [2]
पशु प्रवृत्ति मनुष्य द्वारा अपनाने योग्य है अथवा नहीं ? 'मनुष्यता' कविता के आधार पर कारण सहित उत्तर दीजिए ।
Previously asked in: 2025 4/5/1 Q10 (II)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:15 · grounding rag
Model Answer
नहीं, पशु प्रवृत्ति मनुष्य द्वारा अपनाने योग्य नहीं है। कवि मैथिलीशरण गुप्त के अनुसार —
> "वही पशु-प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे,
> वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।"
केवल अपने लिए जीना पशु का स्वभाव है। सच्चा मनुष्य वह है जो परोपकार करे और दूसरों के लिए जिए।
Source: मनुष्यता, chapter 3, स्पर्श
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Explanation
- परीक्षक "कारण सहित" माँगते हैं, इसलिए कविता की पंक्ति उद्धृत करना ज़रूरी है — यही मुख्य प्रमाण है।
- उत्तर में स्पष्ट "हाँ/नहीं" से शुरू करें, फिर काव्य-पंक्ति, फिर एक-दो वाक्यों में स्पष्टीकरण दें।
- 2 अंक: 1 अंक मत (opinion) + 1 अंक कारण/प्रमाण।
Q8. [2]
किसी भी देश के विकास के लिए उदार व्यक्तियों की आवश्यकता होती है, कैसे? 'मनुष्यता' कविता के आधार पर लिखिए।
Previously asked in: 2025 4/4/1 Q10 (ii)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:15 · grounding rag
Model Answer
'मनुष्यता' कविता के अनुसार उदार व्यक्ति वह है जो परोपकार करे और दूसरों के लिए जीए-मरे। उसी उदार की कीर्ति सदा जीवित रहती है और समस्त सृष्टि उसे पूजती है। ऐसे व्यक्ति परस्परावलंब और सहानुभूति से देश को उन्नति के मार्ग पर ले जाते हैं।
Source: मनुष्यता, स्पर्श — Chapter 3
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Explanation
- परीक्षक यह देखते हैं कि उत्तर में उदार व्यक्ति की परिभाषा (परोपकारी, दूसरों के लिए जीने-मरने वाला) और देश के विकास से जोड़ (परस्परावलंब, सहानुभूति, कीर्ति) दोनों हों।
- कविता की पंक्तियों के भाव को अपने शब्दों में लिखें — उद्धरण देना अनिवार्य नहीं, पर सहायक है।
- 2 अंक के लिए दो स्पष्ट बिंदु पर्याप्त हैं।
Q9. [2]
'मनुष्यता' कविता में 'अभीष्ट मार्ग' पर आगे बढ़ते हुए कवि ने किस बात का ध्यान रखने की बात कही है ?
Previously asked in: 2025 4/3/1 Q10 (ख)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:15 · grounding rag
Model Answer
'अभीष्ट मार्ग' पर आगे बढ़ते हुए कवि ने यह ध्यान रखने की बात कही है कि आपस में मेल-जोल बना रहे और भिन्नता न बढ़े। सभी लोग एक ही पंथ के सतर्क पथिक बनकर विपत्तियों और विघ्नों को हँसते हुए ढकेलते आगे बढ़ें।
Source: मनुष्यता (कविता), chapter 3
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Explanation
परीक्षक इस श्लोक की अंतिम दो पंक्तियों पर ध्यान देते हैं — "घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी / अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी।" उत्तर में 'हेलमेल', 'भिन्नता न बढ़े' और 'सतर्क पथिक' — ये तीनों भाव आने चाहिए। दो अंक के लिए यही पर्याप्त है।
Q10. [7]
भोजन की बर्बादी से तात्पर्य उस भोजन से है जिसे खाया नहीं जाता और फेंक दिया जाता है। अनेक लोग अधिक मात्रा में भोजन खरीदते हैं और समाप्ति तिथि के बाद खोले बिना ही उसे फेंक दिया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन द्वारा प्रकाशित आँकड़ों के अनुसार दुनियाभर में हर साल 1-3 अरब टन भोजन बर्बाद हो जाता है। यह आँकड़ा मानव उपयोग के लिए बनाए गए सभी खाद्य पदार्थों का एक-तिहाई है। दुनिया भर में लगभग एक अरब लोग कुपोषित या भूखे हैं। हम जिस भोजन को बर्बाद करने की प्रवृत्ति रखते हैं उसका केवल एक-चौथाई हिस्सा ही उन्हें ठीक से खिलाने में मदद कर सकता है। हमारे ग्रह पर उभर रही इस बड़ी समस्या का समाधान माँग के साथ खाद्य उत्पादन को संतुलित करना, खाद्य संचयन, भंडारण, प्रसंस्करण और वितरण प्रणालियों को बेहतर बनाना है। बर्बादी को सीमित करने के लिए अत्यधिक बिक्री को भी कम किया जा सकता है। प्रत्येक व्यक्ति एक योजना के साथ भोजन खरीदे और तैयार करे ताकि कम भोजन बर्बाद हो। खाद्य पुनर्चक्रण सबसे ज्ञात समाधानों में से एक है।
भोजन की बर्बादी पृथ्वी ग्रह पर सबसे बड़ी समस्याओं में से एक रही है जिसमें पृथ्वी को काफी हद तक प्रभावित किया है। इस समस्या को नियंत्रित कर आने वाली पीढ़ियों को भविष्य में होने वाली बड़ी समस्याओं जैसे ग्लोबल वार्मिंग और ग्रीन हाउस गैसों की पहुँच के कारण जलवायु परिवर्तन से बचा सकती है। खाद्य प्रणालियों की दक्षता में वृद्धि और भोजन की बर्बादी में कमी लाने के लिए नवाचार टेक्नोलॉजी व बुनियादी ढाँचे के संसाधनों में निवेश की आवश्यकता है। बर्बाद भोजन को कूड़ा खाद के रूप में इस्तेमाल करके भी पर्यावरण पर इसके दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए :
- (i) इस गद्यांश में लेखक की चिंता का विषय है : [1]
- (A) वैश्विक स्तर पर बढ़ता प्रदूषण का स्तर
- (B) वैश्विक स्तर पर लोगों का कुपोषित होना
- (C) विश्व स्तर पर होने वाली भोजन की बर्बादी
- (D) विश्व की एक-तिहाई आबादी का भूखे रहना
- (ii) मानवीयता के साथ-साथ भोजन की बर्बादी प्रभावित करती है : [1]
- (A) पर्यावरण को
- (B) जीव-जंतुओं को
- (C) अर्थव्यवस्था को
- (D) समाज को
- (iii) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यान से पढ़िए और सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए :
कथन : भोजन की बर्बादी जलवायु परिवर्तन का भी कारक है।
कारण : भूमि पर फेंका गया भोजन तीव्र मात्रा में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन करता है। [1]
- (A) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं।
- (B) कारण सही है, लेकिन कथन ग़लत है।
- (C) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है।
- (D) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (iv) भोजन की बर्बादी पर्यावरण को किस प्रकार क्षति पहुँचाती है ? इसे किस प्रकार कम किया जा सकता है ? [2]
- (v) भोजन की बर्बादी से आप क्या समझते हैं और इसके क्या कारण हैं ? [2]
Previously asked in: 2025 4/3/1 Q2
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Model Answer
(i) (C) विश्व स्तर पर होने वाली भोजन की बर्बादी
(ii) (A) पर्यावरण को
(iii) (C) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है।
(गद्यांश में ग्रीन हाउस गैसों का उल्लेख है, परंतु भूमि पर फेंके गए भोजन से गैस उत्सर्जन का विशेष उल्लेख नहीं है।)
(iv) भोजन की बर्बादी ग्लोबल वार्मिंग और ग्रीन हाउस गैसों के कारण जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा देकर पर्यावरण को क्षति पहुँचाती है। इसे निम्न प्रकार कम किया जा सकता है —
- बर्बाद भोजन को कूड़ा खाद के रूप में उपयोग करके।
- नवाचार टेक्नोलॉजी व बुनियादी ढाँचे में निवेश करके खाद्य प्रणालियों की दक्षता बढ़ाकर।
(v) भोजन की बर्बादी से तात्पर्य उस भोजन से है जिसे खाया नहीं जाता और फेंक दिया जाता है। इसके प्रमुख कारण हैं —
- लोगों द्वारा आवश्यकता से अधिक भोजन खरीदना।
- समाप्ति तिथि के बाद भोजन को बिना खोले फेंक देना।
- अत्यधिक बिक्री (over-selling) की प्रवृत्ति।
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Explanation
- (i) पूरा गद्यांश भोजन की बर्बादी पर केंद्रित है, अतः (C) सही है।
- (ii) दूसरा अनुच्छेद स्पष्ट करता है कि भोजन की बर्बादी पर्यावरण (ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन) को प्रभावित करती है।
- (iii) कथन गद्यांश से सही है, लेकिन कारण में जो विशेष तथ्य (भूमि पर फेंके भोजन से गैस उत्सर्जन) दिया गया वह गद्यांश में नहीं है — इसलिए (C) चुनें।
- (iv)–(v) में उत्तर सीधे गद्यांश से लें; परीक्षक पैसेज-based evidence देखते हैं।
Q11. [2]
'मनुष्यता' कविता के संदर्भ में लिखिए कि पशु-प्रवृत्ति क्या है । पशु-प्रवृत्ति मानव के लिए निंदनीय क्यों है ?
Previously asked in: 2025 4/2/1 Q10 (ख)
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Model Answer
पशु-प्रवृत्ति वह स्वभाव है जिसमें प्राणी केवल अपने लिए जीता है — जैसे पशु चरागाह में केवल अपना हिस्सा चरकर लौट आते हैं। कवि के अनुसार — "वही पशु-प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे।"
यह प्रवृत्ति मानव के लिए निंदनीय है क्योंकि मनुष्य में चेतना-शक्ति होती है; वह दूसरों के हित का ध्यान रख सकता है। जो केवल अपने लिए जीता है, वह मनुष्य कहलाने योग्य नहीं।
Source: मनुष्यता (कविता), पाठ प्रवेश — chapter 3
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Explanation
- परीक्षक दो बातें देखते हैं: (1) पशु-प्रवृत्ति की सटीक परिभाषा और (2) निंदनीय होने का कारण।
- कविता की पंक्ति उद्धृत करना अंक दिलाता है।
- 'पाठ प्रवेश' से 'चेतना-शक्ति' वाला बिंदु जोड़ने पर उत्तर पूर्ण होता है।
Q12. [5]
चलो अभीष्ट मार्ग में सहर्ष खेलते हुए,
विपत्ति, विघ्न जो पड़ें उन्हें ढकेलते हुए ।
घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी,
अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हों सभी ।
तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।
निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्पों का चयन करके लिखिए :
- (i) मनुष्य की वास्तविक सफलता क्या है ? [1]
- (A) सिर्फ स्वयं का उत्थान
- (B) सिर्फ समाज का उत्थान
- (C) स्वयं के साथ समाज का उत्थान
- (D) साथ चलने वालों का उत्थान
- (ii) इच्छित मार्ग की ओर कैसे बढ़ना चाहिए ? [1]
- (A) तेज़ी के साथ
- (B) शांति के साथ
- (C) खुशी के साथ
- (D) गर्व के साथ
- (iii) जीवन-पथ पर आगे बढ़ते हुए किस बात का ध्यान रखना चाहिए ? [1]
- (A) हर तरह के लोगों के साथ मिल-जुलकर आगे बढ़ना ।
- (B) स्वयं से अधिक दूसरों के सामर्थ्य पर भरोसा करना ।
- (C) पथ में सिर्फ समान विचारधारा वाले लोगों को साथ लेना ।
- (D) भिन्न विचार रखने वालों से दूर रहने का प्रयास करना ।
- (iv) 'मानव जीवन की सार्थकता स्वयं के साथ दूसरों को भी आगे बढ़ाने में है' – यह भाव किस पंक्ति में है ? [1]
- (A) घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी
- (B) अतर्क एक पंथ के सतर्क पंथ हो सभी
- (C) तभी समर्थ भाव है कि तारता हुए तरे
- (D) वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे
- (v) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : हर तरह के भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्र का विकास करना चाहिए ।
कारण : सम्मिलित प्रयास से हुआ विकास अस्थाई प्रकृति का होता है । [1]
- (A) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं ।
- (B) कथन ग़लत है, लेकिन कारण सही है ।
- (C) कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है ।
- (D) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है ।
Previously asked in: 2026 4/3/1 Q9
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Model Answer
(i) (C) स्वयं के साथ समाज का उत्थान
(ii) (C) खुशी के साथ
('सहर्ष खेलते हुए' — अर्थात् प्रसन्नतापूर्वक)
(iii) (A) हर तरह के लोगों के साथ मिल-जुलकर आगे बढ़ना।
(काव्यांश में कहा गया है — 'घटे न हेलमेल हाँ, बढ़े न भिन्नता कभी')
(iv) (C) तभी समर्थ भाव है कि तारता हुआ तरे
(दूसरों को तारते हुए स्वयं भी तरना — यही जीवन की सार्थकता है)
(v) (D) कथन सही है, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है।
(काव्यांश में सम्मिलित प्रयास को प्रेरणा दी गई है, परंतु उसे 'अस्थाई' नहीं कहा गया — वास्तव में सामूहिक प्रयास स्थायी और सशक्त होता है।)
Source: मनुष्यता, अंतिम पद
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Explanation
- (i): "तारता हुआ तरे" = दूसरों को उबारते हुए स्वयं भी उबरना → स्वयं + समाज दोनों का उत्थान।
- (ii): "सहर्ष" का अर्थ है 'खुशी के साथ' — यह सीधा शब्द-अर्थ प्रश्न है।
- (iii): "घटे न हेलमेल… बढ़े न भिन्नता" स्पष्ट रूप से सभी के साथ मिलकर चलने की बात करता है।
- (iv): "तारता हुआ तरे" = खुद तरना + दूसरों को तारना — यही सार्थकता का भाव है। (D) में केवल बलिदान की बात है, सार्थकता की नहीं।
- (v): कथन सही है (भेदभाव से ऊपर उठना चाहिए), लेकिन कारण गलत है क्योंकि सम्मिलित प्रयास अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी व प्रभावशाली होता है।
Q13. [2]
'विचार लो कि मर्त्य हो, न मृत्यु से डरो कभी' — 'मनुष्यता' कविता से उद्धृत प्रस्तुत पंक्ति का भाव कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए ।
Previously asked in: 2022 4/1/1 Q1 (क)
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Model Answer
कवि मैथिलीशरण गुप्त कहते हैं कि मनुष्य को यह स्वीकार करना चाहिए कि वह नश्वर है — मृत्यु तो अवश्यंभावी है। इसलिए मृत्यु से भयभीत होने की आवश्यकता नहीं। बल्कि ऐसा जीवन जियो और ऐसे मरो कि सभी लोग याद करें। परोपकार के लिए जीना-मरना ही सच्ची मनुष्यता है।
Source: मनुष्यता, स्पर्श (पद्य खंड), Chapter 3
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Explanation
- यह पंक्ति कविता के प्रथम छंद से है — परीक्षक चाहते हैं कि छात्र भाव स्पष्ट करे: मृत्यु का भय त्यागो + यादगार/परोपकारी मृत्यु की कामना करो।
- "सुमृत्यु" की अवधारणा को जोड़ना अंक के लिए सहायक है।
- उत्तर हिंदी में, स्पष्ट व संक्षिप्त भाषा में लिखें।
Q14. [3]
'मनुष्यता' कविता के आधार पर लिखिए कि कैसा जीवन जीने वाले लोग मरकर अमर हो जाते हैं ।
Previously asked in: 2023 4/2/1 Q12 (ख)
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Model Answer
'मनुष्यता' कविता के अनुसार जो व्यक्ति दूसरों के लिए जीता और मरता है, वही मरकर अमर हो जाता है। ऐसे लोग —
- परोपकारी होते हैं — रंतिदेव, दधीचि, कर्ण की तरह दूसरों के लिए सर्वस्व त्याग देते हैं।
- उदार होते हैं — सारी सृष्टि उनकी पूजा करती है और उनकी कीर्ति सदा जीवित रहती है।
- सहानुभूतिपूर्ण होते हैं — दूसरों की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझकर उनकी सहायता करते हैं।
- निरहंकारी होते हैं — धन-संपत्ति का घमंड नहीं करते।
कवि कहते हैं — "मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए।"
Source: मनुष्यता (कविता), chapter 3
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Explanation
परीक्षक यहाँ देखते हैं कि छात्र कविता की मूल भावना — परोपकार, उदारता, सहानुभूति — को स्पष्ट करे और एक-दो पौराणिक उदाहरण (रंतिदेव, दधीचि, कर्ण) दे। कविता की कोई एक प्रासंगिक पंक्ति उद्धृत करने से अतिरिक्त प्रभाव पड़ता है। केवल स्वार्थ के लिए जीने वालों को कवि 'पशु-प्रवृत्ति' कहता है — यह contrast याद रखें।
Q15. [5]
उसी उदार की कथा सरस्वती बखानती,
उसी उदार से धरा कृतार्थ भाव मानती ।
उसी उदार की सदा सजीव कीर्ति कूजती;
तथा उसी उदार को समस्त सृष्टि पूजती ।
अखंड आत्म भाव जो असीम विश्व में भरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।।
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए :
- (i) पद्यांश के अनुसार उदार किसे माना गया है ? [1]
- (A) सभ्य व्यक्ति
- (B) परोपकारी व्यक्ति
- (C) प्रसिद्ध व्यक्ति
- (D) मिलनसार व्यक्ति
- (ii) देवी सरस्वती किसका गुणगान करती है ? [1]
- (A) संगीत का
- (B) गायकों का
- (C) सहृदयी का
- (D) ज्ञानी का
- (iii) उदार के प्रति धरती का भाव है : [1]
- (A) संवेदनशीलता
- (B) प्रेम
- (C) मित्रता
- (D) कृतज्ञता
- (iv) रिक्त स्थान के लिए उपयुक्त शब्द का चयन कीजिए : सब जगह अपने लिए न जीकर दूसरों के लिए जीने वालों की _________ गूँजती है । [1]
- (A) चहलपहल
- (B) कीर्ति
- (C) रौनक
- (D) अखंडता
- (v) "अखंड आत्म भाव जो असीम विश्व में भरे" — पंक्ति का भाव है : [1]
- (A) वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना का प्रसार करना
- (B) आध्यात्मिक विचारों को विश्व में प्रसारित करना
- (C) परमात्मा की अखंडता का उल्लेख करना
- (D) आत्मा को परमात्मा का अंश बताना
Previously asked in: 2024 4/5/1 Q7
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Model Answer
(i) (B) परोपकारी व्यक्ति
(ii) (C) सहृदयी का
(iii) (D) कृतज्ञता
(iv) (B) कीर्ति
(v) (A) वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना का प्रसार करना
Source: मनुष्यता, स्पर्श (काव्य-खंड)
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Explanation
- (i) पद्यांश में "उदार" उस व्यक्ति को कहा गया है जो दूसरों के लिए जीता-मरता है — अर्थात् परोपकारी।
- (ii) "सरस्वती बखानती" — सरस्वती उसी उदार (सहृदय/परोपकारी) का गुणगान करती है।
- (iii) "धरा कृतार्थ भाव मानती" — धरती उदार से कृतार्थ (आभारी/कृतज्ञ) अनुभव करती है।
- (iv) "सजीव कीर्ति कूजती" पंक्ति से सीधे उत्तर मिलता है — कीर्ति गूँजती है।
- (v) "अखंड आत्म भाव" का अर्थ है — सम्पूर्ण विश्व को अपना मानना, अर्थात् वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना।
Q16. [5]
विचार लो कि मर्त्य हो न मृत्यु से डरो कभी,
मरो, परंतु यों मरो कि याद जो करें सभी ।
हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिए,
मरा नहीं वही कि जो जिया न आपके लिए ।
वही पशु-प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।।
निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए :
- (i) कवि ने ऐसा क्यों कहा कि मृत्यु से नहीं डरना चाहिए ? [1]
- (A) मृत्यु से यश प्राप्त होता है
- (B) जन्म-मरण ईश्वर के हाथ में है
- (C) मृत्यु के बाद नया शरीर मिलता है
- (D) मृत्यु तो अवश्यंभावी है
- (ii) कवि कैसी मृत्यु को सुमृत्यु कहता है ? [1]
- (A) बिना किसी पीड़ा के हुई मृत्यु
- (B) अपनों के हित प्राप्त होने वाली मृत्यु
- (C) महान उद्देश्य के लिए मरने वाले की मृत्यु
- (D) स्वार्थ सिद्ध करते समय हुई मृत्यु
- (iii) कैसी मृत्यु व्यर्थ है ? [1]
- (A) देश हित प्राप्त होने वाली मृत्यु
- (B) जिस मृत्यु को याद न किया जाए
- (C) दूसरों के लिए संघर्ष करते हुए प्राप्त मृत्यु
- (D) मृत्यु के बाद जो हमेशा याद रहे
- (iv) पशु प्रवृत्ति क्या है ? [1]
- (A) अपने लिए जीना-खाना
- (B) दूसरों के लिए जीना-खाना
- (C) परोपकार का भाव रखना
- (D) दूसरों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना
- (v) कौन-सा/से वाक्य पद्यांश से मेल खाता है/खाते हैं ?
I. उदार मनुष्य दूसरों के लिए जीता-मरता है ।
II. पशु प्रवृत्ति को समझ के साथ अपनाना चाहिए ।
III. मनुष्य जीवन की सार्थकता परोपकार में है ।
IV. जीवन में कुछ पाने के लिए स्वार्थी होना पड़ता है । [1]
- (A) केवल I
- (B) II, IV
- (C) I, III
- (D) II, III
Previously asked in: 2024 4/4/1 Q7
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:14 · grounding stimulus+chapter
Model Answer
(i) (D) मृत्यु तो अवश्यंभावी है
(ii) (C) महान उद्देश्य के लिए मरने वाले की मृत्यु
(iii) (B) जिस मृत्यु को याद न किया जाए
(iv) (A) अपने लिए जीना-खाना
(v) (C) I, III
---
Explanation
- (i): कवि कहता है "विचार लो कि मर्त्य हो" — अर्थात् तुम नश्वर हो, मृत्यु तो होनी ही है, इसलिए डरो मत। विकल्प (D) सही है।
- (ii): "यों मरो कि याद जो करें सभी" — जो मृत्यु सबको याद रहे, महान उद्देश्य के लिए हो, वही सुमृत्यु है। (C) सही है।
- (iii): "हुई न यों सुमृत्यु तो वृथा मरे" — जिसे याद न किया जाए, वह मृत्यु व्यर्थ है। (B) सही है।
- (iv): "वही पशु-प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे" — केवल अपने लिए जीना-खाना पशु-प्रवृत्ति है। (A) सही है।
- (v): कविता कहती है उदार मनुष्य दूसरों के लिए जीता-मरता है (I ✓) और जीवन की सार्थकता परोपकार में है (III ✓)। II और IV कविता के विरुद्ध हैं।
Q17. [2]
'मनुष्यता' कविता में कवि ने गर्वरहित जीवन जीने की सलाह क्यों दी है ?
Previously asked in: 2026 4/5/1 Q10 (i)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:14 · grounding rag
Model Answer
कवि ने गर्वरहित जीवन जीने की सलाह इसलिए दी है क्योंकि धन-संपत्ति तुच्छ और नाशवान है। ईश्वर (त्रिलोकनाथ) सभी के साथ हैं, इसलिए कोई भी अनाथ नहीं है। अहंकार मनुष्य को परोपकार से दूर करता है और वास्तविक मनुष्यता का नाश करता है।
Source: मनुष्यता (कविता), chapter 3
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Explanation
- यह प्रश्न कविता की पंक्तियों "रहो न भूल के कभी मदांध तुच्छ विभा में, सनाथ जान आपको करो न गर्व चित्त में" पर आधारित है।
- परीक्षक दो बिंदु देखते हैं: (1) धन/संपत्ति पर गर्व व्यर्थ है क्योंकि वह तुच्छ है, (2) ईश्वर सबके साथ है इसलिए गर्व की कोई आवश्यकता नहीं।
- उत्तर 40-50 शब्दों में सीमित रखें।
Q18. [2]
'मनुष्यता' कविता के आधार पर लिखिए कि 'अखंड आत्म भाव' रखने के क्या लाभ हैं ?
Previously asked in: 2026 4/4/1 Q10 (i)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:14 · grounding rag
Model Answer
'मनुष्यता' कविता के अनुसार जो व्यक्ति असीम विश्व में 'अखंड आत्म भाव' भरता है, उसे समस्त सृष्टि पूजती है। उसकी कीर्ति सदा सजीव रहती है, धरती उसे कृतार्थ मानती है और सरस्वती उसकी कथा गाती है।
Source: मनुष्यता (कविता), स्पर्श, Chapter 3
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Explanation
- The question asks about the benefits of 'अखंड आत्म भाव' (universal sense of oneness/fellow-feeling), directly from the second stanza of the poem.
- Key benefits to mention: सृष्टि द्वारा पूजा, अमर कीर्ति, धरती का कृतार्थ भाव, सरस्वती द्वारा प्रशंसा — all four are stated in that stanza.
- Do not go beyond the poem; stick to what the text says.