Code: VGVABRQuestions: 13Maximum Marks: 24Generated: 2026-06-15 13:05
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SubjectHindi
Lessonsरवींद्रनाथ ठाकुर – आत्मत्राण
Questions selected13
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Q1. [1]
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उचित विकल्प चुनकर लिखिए : 'आत्मत्राण' कविता में कवि अपने व्यथित चित्त के लिए ईश्वर से क्या माँगता है ?
- (a) दुख का सामना करने हेतु सामर्थ्य
- (b) दुख का सामना करने हेतु सांत्वना
- (c) दुख का सामना करने हेतु करुणा
- (d) दुख का सामना करने हेतु वंचना
Previously asked in: 2023 4/6/1 Q8 (ii)
Q2. [1]
निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर देने के लिए उचित विकल्पों को चुनकर लिखिए : 'आत्मत्राण' कविता में कवि ईश्वर से क्या चाहता है ?
- (a) सुख के क्षणों में परमात्मा की याद
- (b) दुःख के क्षणों में एक सच्चा साथी
- (c) जीवन में दुःख के क्षणों का अभाव
- (d) जीवन में सुख के क्षणों का अभाव
Previously asked in: 2023 4/1/1 Q8 (ii)
Q3. [2]
'आत्मत्राण' कविता की प्रार्थना में क्या विशेषता है ?
Previously asked in: 2025 4/5/1 Q10 (IV)
Q4. [2]
'आत्मत्राण' कविता की प्रार्थना अन्य प्रार्थनाओं से अलग कैसे है? स्पष्ट कीजिए।
Previously asked in: 2025 4/4/1 Q10 (iv)
Q5. [2]
'आत्मत्राण' कविता को पढ़ने के बाद, उसके कवि की किन दो विशेषताओं को आप अपने चरित्र में समायोजित करना चाहेंगे और क्यों ?
Previously asked in: 2025 4/3/1 Q10 (घ)
Q6. [2]
'आत्मत्राण' कविता का कवि विपत्ति में ईश्वर से सहायता नहीं बल्कि विपत्ति का सामना करने की शक्ति माँग रहा है, इससे कवि के स्वभाव की किस विशेषता का पता चलता है ?
Previously asked in: 2026 4/2/1 Q8 (ii)
Q7. [3]
'आत्मत्राण' कविता का कवि ईश्वर से सांसारिक सुखों की प्रार्थना न करते हुए, क्या निवेदन कर रहा है ? इससे उसके चरित्र की किस विशेषता का पता चलता है ?
Previously asked in: 2023 4/5/1 Q12 (ख)
Q8.
पद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर के लिए सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : 'आत्मत्राण' कविता के अनुवादक का नाम है :
- (a) रवींद्रनाथ ठाकुर
- (b) रवींद्रनाथ सिंह
- (c) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
- (d) हज़ारी प्रसाद चतुर्वेदी
Previously asked in: 2023 4/5/1 Q8 (i)
Q9. [1]
पठित पद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर के लिए सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए : निम्नलिखित कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़िए :
(क) विपदा के समय ईश्वर अपने भक्तों की स्वयं ही सहायता करते हैं ।
(ख) कवि ईश्वर से अपने कर्मों के सकारात्मक परिणाम की अपेक्षा रखते हैं ।
(ग) विपरीत परिस्थितियों में आत्मबल और पुरुषार्थ का साथ नहीं छोड़ना चाहिए ।
(घ) विपरीत परिस्थितियों में ईश्वर के अस्तित्व पर संदेह नहीं करना चाहिए ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन 'आत्मत्राण' कविता से प्राप्त संदेश को दर्शाते हैं ?
- (a) (क) और (ख)
- (b) (ख) और (ग)
- (c) (ग) और (घ)
- (d) (क) और (घ)
Previously asked in: 2023 4/2/1 Q8 (ii)
Q10. [3]
'आत्मत्राण' कविता के माध्यम से कवि ने अपने अंतर्मन की भावना को किस प्रकार अभिव्यक्त किया है ?
Previously asked in: 2024 4/5/1 Q12 (ख)
Q11. [3]
'आत्मत्राण' कविता की कौन-सी दो बातें आपको बहुत प्रेरित करती हैं और क्यों ? अपने शब्दों में लिखिए ।
Previously asked in: 2024 4/4/1 Q12 (ग)
Q12. [2]
अपने जीवन के सुख के क्षणों में कवि की ईश्वर से क्या अपेक्षा है ? 'आत्मत्राण' कविता के आधार पर लिखिए ।
Previously asked in: 2026 4/5/1 Q10 (iv)
Q13. [2]
'आत्म त्राण' कविता के संदर्भ में लिखिए कि संकट में अपनों का साथ न मिलने तथा उनसे छले जाने पर भी कवि संकट का सामना कैसे करना चाहता है ?
Previously asked in: 2026 4/4/1 Q10 (iii)
Code: VGVABRQuestions: 13Maximum Marks: 24Generated: 2026-06-15 13:05
Q1. [1]
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उचित विकल्प चुनकर लिखिए : 'आत्मत्राण' कविता में कवि अपने व्यथित चित्त के लिए ईश्वर से क्या माँगता है ?
- (a) दुख का सामना करने हेतु सामर्थ्य
- (b) दुख का सामना करने हेतु सांत्वना
- (c) दुख का सामना करने हेतु करुणा
- (d) दुख का सामना करने हेतु वंचना
Previously asked in: 2023 4/6/1 Q8 (ii)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:19 · grounding rag
Model Answer
(a) दुख का सामना करने हेतु सामर्थ्य
'आत्मत्राण' कविता में कवि ईश्वर से दुखों से मुक्ति नहीं, बल्कि उन्हें सहन करने और उनका सामना करने की सामर्थ्य माँगता है।
Source: पाठ प्रवेश, अध्याय 7
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Explanation
- कवि (रवींद्रनाथ ठाकुर) ईश्वर से विपदाओं को हटाने की प्रार्थना नहीं करते, बल्कि स्वयं संघर्ष करने की शक्ति माँगते हैं।
- पाठ प्रवेश में स्पष्ट है: "कवि कामना करता है कि किसी भी आपद-विपद में... सफल होने के लिए संघर्ष वह स्वयं करे।"
- विकल्प (b) सांत्वना और (c) करुणा — कवि इन्हें अस्वीकार करता है ("न दो सांत्वना नहीं सही")।
- विकल्प (d) वंचना — यह ऋणात्मक भाव है, जो यहाँ अप्रासंगिक है।
- सामर्थ्य = शक्ति — यही 'आत्मत्राण' (स्वयं को त्राण/मुक्ति देना) की केंद्रीय भावना है।
Q2. [1]
निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर देने के लिए उचित विकल्पों को चुनकर लिखिए : 'आत्मत्राण' कविता में कवि ईश्वर से क्या चाहता है ?
- (a) सुख के क्षणों में परमात्मा की याद
- (b) दुःख के क्षणों में एक सच्चा साथी
- (c) जीवन में दुःख के क्षणों का अभाव
- (d) जीवन में सुख के क्षणों का अभाव
Previously asked in: 2023 4/1/1 Q8 (ii)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
(b) दुःख के क्षणों में एक सच्चा साथी
Source: आत्मत्राण, chapter 7
Explanation
कविता में कवि ईश्वर से विपदाओं को हटाने की नहीं, बल्कि दुःख में भय न हो और ईश्वर पर संशय न हो — ऐसी मानसिक शक्ति माँगता है। अतः विकल्प (b) सबसे उचित है। परीक्षा में सीधे सही विकल्प लिखना पर्याप्त है।
Q3. [2]
'आत्मत्राण' कविता की प्रार्थना में क्या विशेषता है ?
Previously asked in: 2025 4/5/1 Q10 (IV)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
'आत्मत्राण' कविता की प्रार्थना में विशेषता यह है कि कवि ईश्वर से विपत्तियों को दूर करने की याचना नहीं करता, बल्कि उन्हें सहन करने की शक्ति माँगता है। वह स्वयं संघर्ष करना चाहता है और केवल आत्मबल एवं अटूट विश्वास की कामना करता है।
Source: आत्मत्राण, पाठ प्रवेश एवं प्रश्न-अभ्यास
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Explanation
- परीक्षक यहाँ चाहते हैं कि छात्र प्रार्थना की अनूठी विशेषता बताए — यह सामान्य प्रार्थनाओं से अलग है क्योंकि कवि कठिनाई हटाने की नहीं, सहने की शक्ति माँगता है।
- 'पाठ प्रवेश' में स्पष्ट है: "कवि कामना करता है कि संघर्ष वह स्वयं करे, प्रभु को कुछ न करना पड़े।"
- 2 अंक के लिए एक-दो केंद्रीय बिंदु पर्याप्त हैं; विस्तार की आवश्यकता नहीं।
Q4. [2]
'आत्मत्राण' कविता की प्रार्थना अन्य प्रार्थनाओं से अलग कैसे है? स्पष्ट कीजिए।
Previously asked in: 2025 4/4/1 Q10 (iv)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
'आत्मत्राण' कविता की प्रार्थना अन्य प्रार्थनाओं से इसलिए अलग है क्योंकि सामान्यतः लोग ईश्वर से कष्टों को दूर करने और सहायता माँगते हैं, किंतु इस कविता में कवि विपदाओं से रक्षा नहीं चाँहता। वह केवल यह प्रार्थना करता है कि उसे कठिनाइयों से स्वयं संघर्ष करने की शक्ति मिले और दुःख में भी मन पर विजय पाने का साहस मिले।
Source: पाठ प्रवेश एवं प्रश्न-अभ्यास, chapter 7
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Explanation
- Examiner expects the contrast between ordinary prayers (asking God to remove problems) and this prayer (asking for inner strength to face them oneself).
- Key phrase to use: "विपदाओं से रक्षा नहीं, संघर्ष करने की शक्ति माँगना।"
- The पाठ प्रवेश clearly states: "कवि कामना करता है कि किसी भी आपद-विपद में सफल होने के लिए संघर्ष वह स्वयं करे, प्रभु को कुछ न करना पड़े।" — use this idea directly.
Q5. [2]
'आत्मत्राण' कविता को पढ़ने के बाद, उसके कवि की किन दो विशेषताओं को आप अपने चरित्र में समायोजित करना चाहेंगे और क्यों ?
Previously asked in: 2025 4/3/1 Q10 (घ)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
'आत्मत्राण' कविता पढ़कर मैं कवि की निम्न दो विशेषताएँ अपनाना चाहूँगा:
- आत्मबल और निर्भयता — कवि विपदाओं से बचाने की प्रार्थना न करके भय से मुक्त रहने की कामना करता है। यह आत्मनिर्भरता जीवन में संघर्ष करने की प्रेरणा देती है।
- ईश्वर पर अटूट विश्वास — कठिन परिस्थितियों में भी कवि ईश्वर पर संशय नहीं करता। यह दृढ़ आस्था मन को स्थिर रखती है।
Source: आत्मत्राण, chapter 7
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Explanation
यह मूल्यपरक प्रश्न है। परीक्षक चाहते हैं कि छात्र कविता से दो ठोस गुण लेकर उन्हें अपने जीवन से जोड़े। 'भय न पाऊँ' और 'संशय न करूँ' — ये कविता की दो केंद्रीय भावनाएँ हैं, इन्हें अपने शब्दों में लिखें। उत्तर में 'क्यों' का स्पष्ट उल्लेख जरूरी है वरना अंक कटते हैं।
Q6. [2]
'आत्मत्राण' कविता का कवि विपत्ति में ईश्वर से सहायता नहीं बल्कि विपत्ति का सामना करने की शक्ति माँग रहा है, इससे कवि के स्वभाव की किस विशेषता का पता चलता है ?
Previously asked in: 2026 4/2/1 Q8 (ii)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
इससे कवि के स्वभाव की आत्मनिर्भरता और साहसी प्रवृत्ति का पता चलता है। कवि दूसरों पर निर्भर न रहकर स्वयं संघर्ष करना चाहता है। वह ईश्वर से केवल आंतरिक शक्ति, निर्भयता और दृढ़ मनोबल की कामना करता है ताकि विपत्तियों का सामना वह स्वयं कर सके।
Source: आत्मत्राण, chapter 7
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Explanation
- Examiners look for two key traits: आत्मनिर्भरता (self-reliance) और साहस/दृढ़ता (courage/resilience).
- Support with evidence from the poem — कवि विपदा से बचाने की नहीं, बल्कि विपदा में भय न हो, यह शक्ति माँगता है।
- Avoid writing a long paragraph; two focused points with brief justification are enough for 2 marks.
Q7. [3]
'आत्मत्राण' कविता का कवि ईश्वर से सांसारिक सुखों की प्रार्थना न करते हुए, क्या निवेदन कर रहा है ? इससे उसके चरित्र की किस विशेषता का पता चलता है ?
Previously asked in: 2023 4/5/1 Q12 (ख)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
'आत्मत्राण' कविता में कवि रवींद्रनाथ ठाकुर ईश्वर से विपदाओं से बचाने की नहीं, बल्कि निम्न निवेदन करते हैं —
- विपदाओं में भय न हो, दुःख पर विजय पा सकें।
- सहायक न मिलने पर भी अपना बल और पौरुष बना रहे।
- बोझ को निर्भय होकर स्वयं वहन कर सकें।
- सुख-दुःख दोनों में ईश्वर पर अटूट विश्वास बना रहे।
इससे कवि के चरित्र की आत्मनिर्भरता, साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति की विशेषता का पता चलता है। वह सुविधा नहीं, संघर्ष करने की शक्ति माँगता है।
Source: आत्मत्राण (कविता), Chapter 7
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Explanation
- Examiner expects two parts: कवि की प्रार्थना क्या है + चरित्र की विशेषता।
- Quote specific lines from the poem to show you've read it carefully (विपदाओं से बचाओ नहीं, बल्कि भय न हो, आदि)।
- The character trait is self-reliance (आत्मनिर्भरता) — always mention it by name.
- Avoid long introductions; go directly to the points.
Q8.
पद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर के लिए सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए : 'आत्मत्राण' कविता के अनुवादक का नाम है :
- (a) रवींद्रनाथ ठाकुर
- (b) रवींद्रनाथ सिंह
- (c) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
- (d) हज़ारी प्रसाद चतुर्वेदी
Previously asked in: 2023 4/5/1 Q8 (i)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
(c) हज़ारी प्रसाद द्विवेदी
Explanation
The passage clearly states: "रवींद्रनाथ ठाकुर की प्रस्तुत कविता का बंगला से हिंदी में अनुवाद श्रद्धेय आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी जी ने किया है।" So the translator is Hazari Prasad Dwivedi, not Chaturvedi. Option (a) is the original poet, not the translator. Be careful not to confuse the poet with the translator — a common exam mistake.
Q9. [1]
पठित पद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर के लिए सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए : निम्नलिखित कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़िए :
(क) विपदा के समय ईश्वर अपने भक्तों की स्वयं ही सहायता करते हैं ।
(ख) कवि ईश्वर से अपने कर्मों के सकारात्मक परिणाम की अपेक्षा रखते हैं ।
(ग) विपरीत परिस्थितियों में आत्मबल और पुरुषार्थ का साथ नहीं छोड़ना चाहिए ।
(घ) विपरीत परिस्थितियों में ईश्वर के अस्तित्व पर संदेह नहीं करना चाहिए ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन 'आत्मत्राण' कविता से प्राप्त संदेश को दर्शाते हैं ?
- (a) (क) और (ख)
- (b) (ख) और (ग)
- (c) (ग) और (घ)
- (d) (क) और (घ)
Previously asked in: 2023 4/2/1 Q8 (ii)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
उत्तर: (c) (ग) और (घ)
कविता में कवि विपरीत परिस्थितियों में आत्मबल व पुरुषार्थ बनाए रखने ("अपना बल पौरुष न हिले") तथा ईश्वर पर संशय न करने ("तुम पर करूँ नहीं कुछ संशय") की प्रार्थना करता है।
Explanation
- कथन (क) गलत है — कवि चाहता है कि ईश्वर उसे स्वयं न बचाएँ, वह स्वयं संघर्ष करे।
- कथन (ख) गलत है — कवि अपने कर्मों के सकारात्मक परिणाम की नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति की माँग करता है।
- कथन (ग) और (घ) सीधे कविता की पंक्तियों से प्रमाणित होते हैं, इसलिए विकल्प (c) सही है।
Q10. [3]
'आत्मत्राण' कविता के माध्यम से कवि ने अपने अंतर्मन की भावना को किस प्रकार अभिव्यक्त किया है ?
Previously asked in: 2024 4/5/1 Q12 (ख)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
'आत्मत्राण' कविता में कवि रवींद्रनाथ ठाकुर ने अपनी आंतरिक भावना को एक अनोखी प्रार्थना के रूप में व्यक्त किया है। कवि ईश्वर से विपदाओं को हटाने की प्रार्थना नहीं करता, बल्कि उन्हें सहन करने का साहस माँगता है। वह चाहता है कि दुखों पर विजय पाने की शक्ति मिले, भार हल्का न हो पर उसे निर्भय होकर वहन कर सके। सुख के दिनों में भी ईश्वर को न भूले और संकट में ईश्वर पर संदेह न करे। इस प्रकार कवि आत्मबल और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च मानता है।
Source: आत्मत्राण, chapter 7
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Explanation
- परीक्षक 3-mark उत्तर में तीन मुख्य बिंदु देखते हैं: (1) कवि की प्रार्थना का स्वरूप — विपदा से बचाओ नहीं, बल्कि सहने की शक्ति दो; (2) दुख, हानि और एकाकीपन में भी मनोबल बनाए रखना; (3) सुख-दुख दोनों में ईश्वर पर अटूट विश्वास।
- 'आत्मत्राण' = आत्मा का उद्धार स्वयं करना — यह शीर्षक की सार्थकता भी दर्शाता है।
- पाठ्यपुस्तक की कविता की पंक्तियों को संक्षेप में उद्धृत करना उत्तर को पुष्ट करता है।
Q11. [3]
'आत्मत्राण' कविता की कौन-सी दो बातें आपको बहुत प्रेरित करती हैं और क्यों ? अपने शब्दों में लिखिए ।
Previously asked in: 2024 4/4/1 Q12 (ग)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
'आत्मत्राण' कविता की दो बातें जो मुझे बहुत प्रेरित करती हैं:
1. विपदा में भय न मानना: कवि ईश्वर से विपदाओं को हटाने की नहीं, बल्कि उनका सामना करने का साहस माँगता है — "विपदाओं से मुझे बचाओ, यह मेरी प्रार्थना नहीं।" यह बात प्रेरित करती है क्योंकि यह हमें कठिनाइयों से भागने के बजाय उनसे लड़ना सिखाती है।
2. हानि में भी मन न टूटना: कवि कहता है कि जगत में हानि उठानी पड़े, लाभ न मिले, तब भी मन में हार न मानूँ। यह बात इसलिए प्रेरणादायक है क्योंकि असफलता में भी आत्मविश्वास बनाए रखना जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है।
Source: आत्मत्राण, कविता एवं पाठ प्रवेश — chapter 7
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Explanation
- यह प्रश्न व्यक्तिगत अनुभव से जोड़ने वाला है, इसलिए "मुझे प्रेरित करती है" जैसी भाषा प्रयोग करें।
- दो बातें स्पष्ट रूप से अलग-अलग लिखें और "क्यों" का उत्तर हर बिंदु में दें — यही परीक्षक की मुख्य माँग है।
- कविता की पंक्ति उद्धृत करना अतिरिक्त अंक दिला सकता है।
- उत्तर अपने शब्दों में हो, लेकिन कविता से जुड़ा रहे।
Q12. [2]
अपने जीवन के सुख के क्षणों में कवि की ईश्वर से क्या अपेक्षा है ? 'आत्मत्राण' कविता के आधार पर लिखिए ।
Previously asked in: 2026 4/5/1 Q10 (iv)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
'आत्मत्राण' कविता में कवि सुख के क्षणों में ईश्वर से यह अपेक्षा रखता है कि वह नतमस्तक होकर प्रभु के मुख को पहचाने — अर्थात् सुख में भी ईश्वर को न भूले और उनके प्रति कृतज्ञता एवं भक्ति-भाव बनाए रखे।
Source: 'आत्मत्राण', प्रश्न-अभ्यास (ख)1 — नत शिर होकर सुख के दिन में / तव मुख पहचानूँ छिन-छिन में।
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Explanation
- परीक्षा में इस पंक्ति का सीधा संदर्भ देना आवश्यक है: "नत शिर होकर सुख के दिन में, तव मुख पहचानूँ छिन-छिन में।"
- मुख्य भाव: कवि दुःख में ही नहीं, सुख में भी ईश्वर को याद करना चाहता है — यही इस प्रार्थना की विशेषता है।
- 'नत शिर' = झुके हुए सिर से (विनम्रता/कृतज्ञता), 'छिन-छिन' = हर पल — इन शब्दों का अर्थ लिखने से अंक मिलते हैं।
Q13. [2]
'आत्म त्राण' कविता के संदर्भ में लिखिए कि संकट में अपनों का साथ न मिलने तथा उनसे छले जाने पर भी कवि संकट का सामना कैसे करना चाहता है ?
Previously asked in: 2026 4/4/1 Q10 (iii)
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
कवि चाहता है कि जब कोई सहायक न मिले, तो उसका अपना बल और पौरुष न डिगे। यदि जगत में हानि उठानी पड़े और लाभ की जगह वंचना ही मिले, तो भी वह मन में पराजय न माने। वह स्वयं संकट का सामना निर्भयता से करना चाहता है।
Source: आत्मत्राण, chapter 7
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Explanation
- परीक्षक यहाँ कविता की दो पंक्तियों — "कोई कहीं सहायक न मिले तो अपना बल पौरुष न हिले" और "हानि उठानी पड़े जगत् में… तो भी मन में न मानूँ क्षय" — का भाव देखते हैं।
- मुख्य बिंदु: आत्मबल बनाए रखना और मानसिक पराजय न स्वीकारना — ये दो बातें ज़रूर लिखें।
- 2 अंक के लिए दोनों विचार संक्षेप में आने चाहिए।