'आत्म त्राण' कविता के संदर्भ में लिखिए कि संकट में अपनों का साथ न मिलने तथा उनसे छले जाने पर भी कवि संकट का सामना कैसे करना चाहता है ?
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Model Answer
कवि चाहता है कि जब कोई सहायक न मिले, तो उसका अपना बल और पौरुष न डिगे। यदि जगत में हानि उठानी पड़े और लाभ की जगह वंचना ही मिले, तो भी वह मन में पराजय न माने। वह स्वयं संकट का सामना निर्भयता से करना चाहता है।
Source: आत्मत्राण, chapter 7
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Explanation
- परीक्षक यहाँ कविता की दो पंक्तियों — "कोई कहीं सहायक न मिले तो अपना बल पौरुष न हिले" और "हानि उठानी पड़े जगत् में… तो भी मन में न मानूँ क्षय" — का भाव देखते हैं।
- मुख्य बिंदु: आत्मबल बनाए रखना और मानसिक पराजय न स्वीकारना — ये दो बातें ज़रूर लिखें।
- 2 अंक के लिए दोनों विचार संक्षेप में आने चाहिए।