'हरिहर काका' कहानी में परिवार और ठाकुरबारी दोनों ने ही अपनी वास्तविक भूमिका का त्याग कर दिया था । यदि समाज में सचमुच ये दोनों अपने मूल दायित्व को छोड़ दें तो समाज पर उसका क्या प्रभाव पड़ेगा ?
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 07:20 · grounding rag
Model Answer
यदि परिवार और धार्मिक संस्थाएँ दोनों अपने मूल दायित्व छोड़ दें तो समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा:
- परिवार का कर्तव्य है सदस्यों को प्रेम, सुरक्षा और सम्मान देना। यदि वह केवल स्वार्थ के लिए संबंध रखे — जैसे हरिहर काका के भाई केवल जायदाद के लिए उनकी सेवा करते थे — तो बुजुर्ग और असहाय लोग बेसहारा हो जाएंगे।
- धार्मिक संस्था का दायित्व है नैतिकता, भक्ति और मार्गदर्शन देना। यदि वह भी महंत की तरह छल-बल से संपत्ति हड़पने लगे, तो समाज का आस्था और नैतिकता में विश्वास टूट जाएगा।
- जब दोनों आधार स्वार्थी हो जाएँ तो निराश्रित व्यक्ति हरिहर काका की तरह मौन, असुरक्षित और अकेला रह जाता है। समाज में अविश्वास, भय और हिंसा का वातावरण बनता है।
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Explanation
परीक्षक इस प्रश्न में मूल्यपरक/रचनात्मक उत्तर की अपेक्षा रखते हैं जो कहानी के घटनाक्रम पर आधारित हो। तीन अंक के लिए तीन स्पष्ट बिंदु — परिवार की भूमिका, ठाकुरबारी की भूमिका, और उनके अभाव का समाज पर प्रभाव — लिखना पर्याप्त है। हरिहर काका का उदाहरण देने से उत्तर ठोस बनता है।