'आत्मत्राण' कविता की दो बातें जो मुझे बहुत प्रेरित करती हैं:
1. विपदा में भय न मानना: कवि ईश्वर से विपदाओं को हटाने की नहीं, बल्कि उनका सामना करने का साहस माँगता है — "विपदाओं से मुझे बचाओ, यह मेरी प्रार्थना नहीं।" यह बात प्रेरित करती है क्योंकि यह हमें कठिनाइयों से भागने के बजाय उनसे लड़ना सिखाती है।
2. हानि में भी मन न टूटना: कवि कहता है कि जगत में हानि उठानी पड़े, लाभ न मिले, तब भी मन में हार न मानूँ। यह बात इसलिए प्रेरणादायक है क्योंकि असफलता में भी आत्मविश्वास बनाए रखना जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है।
Source: आत्मत्राण, कविता एवं पाठ प्रवेश — chapter 7
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