Q1. [5]
भारतीय संस्कृति में नदियों, जलाशयों, झीलों, तालाबों एवं कुओं का बहुत महत्त्व है । भारतीय समाज के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पक्षों से नदियाँ और दूसरे जलस्रोत काफी गहरे से जुड़े हैं । जीवन के अधिकांश पक्ष जलाशयों के किनारे ही पूरे होते हैं । तालाबों ने हमारे सामाजिक जीवन को बहुत अधिक प्रभावित किया है । तालाब अपने जीवन के लिए मानसून एवं प्रकृति पर निर्भर रहते हैं । पहले समाज अपने अस्तित्व के लिए तालाबों पर निर्भर रहता था । तब उसे प्राकृतिक आपदा के समय पीने के पानी की समस्या से कम जूझना पड़ता था क्योंकि तालाबों में पानी का पर्याप्त भण्डार रहता था । उससे ग्रामीण पेयजल और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहता था । पहले हमारा समाज प्रकृति के रहस्यों और उसकी शक्तियों के इर्द-गिर्द घूमता था । पानी, वायु, धूप को वह दैवी कृपा मानकर उसकी पूजा करता था । इसका अभिप्राय यह था कि वह मानव जीवन के लिए उपयोगी प्राकृतिक चीज़ों में भगवान को देखता था इसलिए वह उसे गंदा करने या जरूरत से अधिक इस्तेमाल करने का विरोधी था । तालाब निर्माण से लेकर उसकी रक्षा में लोक अपनी जिम्मेदारी समझता था । नल, ट्यूबवेल आदि के आने से पानी के परंपरागत स्रोतों की उपेक्षा हुई । लोग वर्षा जल संग्रह का पुराना तरीका भूलते गए जिससे नए-नए तरह के खतरे हमारे सामने आने लगे । अब सरकारी और ग़ैर-सरकारी स्तर पर फिर से तालाबों के महत्त्व को समझकर उसके लिए काम शुरू हुआ है ।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इस पर आधारित प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
- (i) तालाब अपने अस्तित्व के लिए निर्भर करते हैं : [1]
- (A) भूगर्भ में स्थित जल पर
- (B) मानवीय कृपा-दृष्टि पर
- (C) मानसून और प्रकृति पर
- (D) नदियों और जलकूपों पर
- (ii) निम्नलिखित में जल का प्राकृतिक स्रोत नहीं है : [1]
- (A) नदी
- (B) झरने
- (C) तालाब
- (D) झील
- (iii) हमारे समाज द्वारा प्रकृति को दैवी शक्ति के रूप में पूजने का क्या कारण है ? [1]
- (A) प्राकृतिक शक्तियों से भयभीत रहना
- (B) प्रकृति के रहस्यों को न समझ पाना
- (C) प्रकृति के कण-कण में ईश्वर का वास मानना
- (D) मानवोपयोगी वस्तुओं को ईश्वर का प्रतिरूप मानना
- (iv) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए । उसके बाद दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर लिखिए : कथन : भारतीय लोक मानस में तालाब एक स्थूल वस्तु न होकर जीवन का अविभाज्य अंग है । कारण : तालाबों और जलाशयों के देखरेख का काम पूरा समाज करता था । [1]
- (A) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं ।
- (B) कारण ग़लत है, लेकिन कथन सही है ।
- (C) कथन और कारण दोनों सही हैं, लेकिन कारण, कथन की ग़लत व्याख्या करता है ।
- (D) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है ।
- (v) जल के परंपरागत स्रोतों की उपेक्षा का कारण है : [1]
- (A) इनका समाप्त हो जाना
- (B) अशुद्ध जल का होना
- (C) आधुनिक स्रोतों का होना
- (D) वर्तमान जीवन-शैली
Previously asked in CBSE board exam
2024 4/5/1 Q2
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 07:20 · grounding stimulus
Model Answer
(i) (C) मानसून और प्रकृति पर
(ii) (C) तालाब
(तालाब मानव-निर्मित जलाशय है, अतः यह प्राकृतिक स्रोत नहीं है।)
(iii) (D) मानवोपयोगी वस्तुओं को ईश्वर का प्रतिरूप मानना
(गद्यांश के अनुसार समाज मानव जीवन के लिए उपयोगी प्राकृतिक चीज़ों में भगवान को देखता था।)
(iv) (D) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है ।
(तालाब समाज के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन का अंग था और उसकी देखरेख पूरा समाज करता था — यही कथन की व्याख्या है।)
(v) (C) आधुनिक स्रोतों का होना
(नल, ट्यूबवेल आदि आधुनिक साधनों के आने से परंपरागत स्रोतों की उपेक्षा हुई।)
Source: अपठित गद्यांश — भारतीय संस्कृति और जलस्रोत
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Explanation
- (i) गद्यांश में स्पष्ट लिखा है: "तालाब अपने जीवन के लिए मानसून एवं प्रकृति पर निर्भर रहते हैं।"
- (ii) नदी, झरने, झील — ये तीनों प्राकृतिक जलस्रोत हैं। तालाब प्रायः मानव-निर्मित होते हैं, इसलिए यह अपवाद है।
- (iii) विकल्प (D) सटीक है क्योंकि गद्यांश कहता है कि लोग "मानव जीवन के लिए उपयोगी प्राकृतिक चीज़ों में भगवान को देखते थे" — यह (C) से अलग और अधिक सटीक है।
- (iv) कथन-कारण प्रश्नों में देखें कि कारण कथन को explain करता है या नहीं — यहाँ दोनों सत्य हैं और कारण कथन की व्याख्या भी करता है।
- (v) गद्यांश में "नल, ट्यूबवेल आदि के आने से" परंपरागत स्रोतों की उपेक्षा का कारण स्पष्ट बताया गया है।
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