(b) चक्रपाणि — इसमें 'जिसके पाणि (हाथ) में चक्र है' अर्थात विष्णु — यह अन्य पद (विष्णु) की प्रधानता दर्शाता है, जो बहुव्रीहि समास की पहचान है।
बहुव्रीहि समास में दोनों पद गौण होते हैं और समस्त पद किसी तीसरे (अन्य) संज्ञा का विशेषण बनता है। "चक्रपाणि" = जिसके हाथ में चक्र है (विष्णु) — यहाँ विष्णु तीसरा पद है। "शांतिप्रिय" तत्पुरुष/कर्मधारय है; "रचनाकार" तत्पुरुष है; "आकाशवाणी" तत्पुरुष है।