मधुर वचन है औषधि
रमेश और सुरेश दो पड़ोसी थे। एक दिन रमेश के बगीचे में सुरेश के बच्चे खेलते-खेलते गिर गए और कुछ पौधे टूट गए। रमेश को बहुत क्रोध आया।
तभी उसकी माँ ने धीरे से कहा — "बेटा, बच्चे हैं, गलती हो जाती है। प्यार से समझाओ।"
रमेश ने स्वयं को संभाला और सुरेश के बच्चों से मुस्कुराते हुए कहा — "बेटा, ध्यान रखना, पौधों को चोट लगती है।" बच्चों ने माफी माँगी और सुरेश भी शर्मिंदा होकर बोला — "भाई, तुम्हारी मीठी बात ने मेरा दिल जीत लिया।"
उस दिन रमेश समझ गया कि कड़वे शब्द रिश्ते तोड़ते हैं और मधुर वचन दिलों को जोड़ते हैं। सच ही कहा है — मधुर वचन है औषधि, कटुक वचन है तीर।
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