'आत्मत्राण' कविता का कवि ईश्वर से सांसारिक सुखों की प्रार्थना न करते हुए, क्या निवेदन कर रहा है ? इससे उसके चरित्र की किस विशेषता का पता चलता है ?
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Model Answer
'आत्मत्राण' कविता में कवि रवींद्रनाथ ठाकुर ईश्वर से विपदाओं से बचाने की नहीं, बल्कि निम्न निवेदन करते हैं —
- विपदाओं में भय न हो, दुःख पर विजय पा सकें।
- सहायक न मिलने पर भी अपना बल और पौरुष बना रहे।
- बोझ को निर्भय होकर स्वयं वहन कर सकें।
- सुख-दुःख दोनों में ईश्वर पर अटूट विश्वास बना रहे।
इससे कवि के चरित्र की आत्मनिर्भरता, साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति की विशेषता का पता चलता है। वह सुविधा नहीं, संघर्ष करने की शक्ति माँगता है।
Source: आत्मत्राण (कविता), Chapter 7
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Explanation
- Examiner expects two parts: कवि की प्रार्थना क्या है + चरित्र की विशेषता।
- Quote specific lines from the poem to show you've read it carefully (विपदाओं से बचाओ नहीं, बल्कि भय न हो, आदि)।
- The character trait is self-reliance (आत्मनिर्भरता) — always mention it by name.
- Avoid long introductions; go directly to the points.