Q1. [5]
हरि आप हरो जन री भीर।
द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
भगत कारण रूप नरहरि, धरयो आप सरीर।
बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुण्जर पीर।
दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर॥
निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए : (5×1=5)
- (i) मीरा श्रीकृष्ण से क्या प्रार्थना कर रही है ? [1]
- (A) अपने चरणों में स्थान देने की
- (B) भक्तों को सुख प्रदान करने की
- (C) अपने दुखों को हरने की
- (D) भक्तों को दर्शन देने की
- (ii) श्रीकृष्ण ने 'नरहरि' रूप क्यों धारण किया था ? [1]
- (A) द्रौपदी की रक्षा के लिए
- (B) प्रहलाद की रक्षा के लिए
- (C) गजराज की रक्षा के लिए
- (D) भक्तों की रक्षा के लिए
- (iii) काव्यांश में पौराणिक पात्रों का उल्लेख किस उद्देश्य से किया गया है ? [1]
- (A) श्रीकृष्ण की भक्तवत्सलता को दर्शाने हेतु
- (B) श्रीकृष्ण की सक्षमता को दर्शाने हेतु
- (C) श्रीकृष्ण की महानता को दर्शाने हेतु
- (D) कृष्ण के प्रति मीरा की भक्तिभावना दर्शाने हेतु
- (iv) काव्यांश के अनुसार श्रीकृष्ण के प्रति मीरा की भक्ति में प्रधानता है : [1]
- (A) दास्य भाव की
- (B) सख्य भाव की
- (C) उपालंभ भाव की
- (D) शोक भाव की
- (v) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : मीरा को पूर्ण विश्वास है कि श्रीकृष्ण उसके कष्टों का निवारण अवश्य करेंगे।
कारण : वे भक्तों की पुकार सुनकर दौड़े चले आते हैं और उन्हें कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं। [1]
- (A) कथन तथा कारण दोनों ग़लत हैं।
- (B) कारण सही है, लेकिन कथन ग़लत है।
- (C) कथन तथा कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
- (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं, लेकिन कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
Previously asked in CBSE board exam
2026 4/2/1 Q7
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:19 · grounding stimulus+chapter
Model Answer
(i) (C) अपने दुखों को हरने की
(ii) (B) प्रहलाद की रक्षा के लिए
(iii) (A) श्रीकृष्ण की भक्तवत्सलता को दर्शाने हेतु
(iv) (A) दास्य भाव की
(मीरा स्वयं को "दासी मीराँ" कहती हैं।)
(v) (C) कथन तथा कारण दोनों सही हैं और कारण, कथन की सही व्याख्या करता है।
Source: मीरा के पद, काव्य-खंड
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Explanation
- (i) पद की पहली और अंतिम पंक्ति में मीरा "भीर" (कष्ट/दुख) हरने की प्रार्थना करती हैं — यही केंद्रीय भाव है।
- (ii) "भगत कारण रूप नरहरि" — नरसिंह अवतार भक्त प्रहलाद की रक्षा हेतु लिया गया था, द्रौपदी या गजराज के लिए नहीं।
- (iii) द्रौपदी, प्रहलाद, गजराज — तीनों उदाहरण कृष्ण/विष्णु की भक्तवत्सलता (भक्तों पर कृपा) सिद्ध करते हैं।
- (iv) "दासी मीराँ" — मीरा अपने को दास (सेविका) बताती हैं → दास्य भाव की प्रधानता।
- (v) मीरा का विश्वास पूर्व के उदाहरणों (द्रौपदी, प्रहलाद, गजराज) पर आधारित है — कारण सीधे कथन की व्याख्या करता है।
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