Q1. [7]
गाँधीजी ने संसार को जो संदेश दिया था, वह सर्वोदय का संदेश था । उस संदेश की जितनी पहले आवश्यकता थी, उतनी ही आज भी है । गाँधीजी ने अपने जीवन-काल में न केवल वाणी और लेखनी द्वारा, बल्कि अपने आचरण द्वारा भी उस महान संदेश का प्रचार किया था ।
गाँधीजी ने इस पर ख़ूब जोर दिया था कि किसी अच्छे उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए अशुद्ध साधनों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए । उन्होंने हमें सिखाया था कि अशुद्ध साधनों द्वारा उत्तम उद्देश्य हासिल नहीं किया जा सकता । यही कारण था कि उन्होंने देश की स्वतंत्रता के श्रेष्ठ लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए हिंसात्मक और आतंकवादी कार्रवाइयों का त्याग करने और सत्य तथा अहिंसा का मार्ग अपनाने की सलाह दी है । इसका परिणाम हम अपनी आँखों से देख चुके हैं । व्यवहार में यह रास्ता ज्यादा सीधा और सरल साबित हुआ । कम-से-कम हानि उठाकर हमने अपनी स्वतंत्रता हासिल की और जो कल तक हमारे विरोधी थे, वही हमारे मित्र बन गए हैं । इसके विपरीत यूरोप के पिछले दो महायुद्धों के उदाहरण भी हमारे सामने हैं । इन महायुद्धों में जन-धन का भयंकर विनाश हुआ, वह तो हुआ ही; उन नैतिक मूल्यों का भी ह्रास हो गया, जिनके कारण मनुष्य मनुष्य कहलाने का अधिकारी होता है । वे समस्याएँ आज भी बनी हुई हैं जिन्हें हल करने के लिए महायुद्ध लड़े गए थे । अत: सर्वोदय सम्मेलन में साधनों की शुद्धता पर जो बल दिया गया है, वह सर्वथा उचित है ।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए :
- (i) 'गाँधीजी ने अपने आचरण द्वारा भी उस महान संदेश का प्रचार किया था ।' – पंक्ति में किस महान संदेश की ओर संकेत किया गया है ? [1]
- (A) सत्य और अहिंसा का संदेश
- (B) सर्वोदय का संदेश
- (C) शुभ आचरण का संदेश
- (D) नैतिक मूल्यों का संदेश
- (ii) 'गाँधीजी के भौतिक रूप से हमारे बीच उपस्थित न रहने' – से क्या अभिप्राय है ? [1]
- (A) आत्मिक रूप से उपस्थित न होना
- (B) सैद्धांतिक रूप से उपस्थित न होना
- (C) प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित न होना
- (D) मानसिक रूप में उपस्थित न होना
- (iii) निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : सर्वोदय के संदेश की दुनिया को जितनी आवश्यकता पहले थी, उतनी ही आवश्यकता आज भी है ।
कारण : समाज में विद्यमान समस्याओं के मूल रूप में पहले से अब तक विशेष अंतर नहीं आया है । [1]
- (A) कथन ग़लत है, परन्तु कारण सही है ।
- (B) कथन और कारण दोनों ग़लत हैं ।
- (C) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है ।
- (D) कथन सही है, परन्तु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है ।
- (iv) देश की स्वतंत्रता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए गाँधीजी ने किस मार्ग को अपनाने की सलाह दी और क्यों ? [2]
- (v) स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए गाँधीजी द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने के क्या परिणाम निकले ? [2]
Previously asked in CBSE board exam
2025 4/2/1 Q1
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:14 · grounding stimulus
Model Answer
(i) (B) सर्वोदय का संदेश
(ii) (C) प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित न होना
(iii) (D) कथन सही है, परन्तु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं करता है ।
(iv) गाँधीजी ने देश की स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए सत्य और अहिंसा का मार्ग अपनाने की सलाह दी। उन्होंने हिंसात्मक और आतंकवादी कार्रवाइयों का त्याग करने को कहा। इसका कारण यह था कि उनके अनुसार अशुद्ध साधनों द्वारा उत्तम उद्देश्य कभी हासिल नहीं किया जा सकता — अर्थात् साधनों की शुद्धता अनिवार्य है।
(v) गाँधीजी के दिखाए सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने के परिणाम बहुत सकारात्मक रहे। यह रास्ता व्यवहार में सीधा और सरल साबित हुआ। कम-से-कम हानि उठाकर देश को स्वतंत्रता मिली और जो अंग्रेज कल तक विरोधी थे, वे भी मित्र बन गए। इसके विपरीत यूरोप के महायुद्धों में हिंसा के कारण जन-धन का भयंकर विनाश हुआ और नैतिक मूल्यों का भी ह्रास हो गया।
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Explanation
- (i) गद्यांश की पहली पंक्ति में ही "सर्वोदय का संदेश" स्पष्ट रूप से उल्लिखित है।
- (ii) "भौतिक रूप से उपस्थित न रहना" का अर्थ है शरीर से, यानी प्रत्यक्ष रूप से न होना।
- (iii) कथन गद्यांश से सही है, लेकिन दिया गया कारण गद्यांश में नहीं है, इसलिए वह कथन की व्याख्या नहीं करता।
- (iv–v) 2-mark उत्तरों में दो-तीन स्पष्ट बिंदु अपेक्षित हैं — गद्यांश से सीधे तथ्य लिखें, विस्तार न करें।
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