'मनुष्यता' कविता के संदर्भ में लिखिए कि पशु-प्रवृत्ति क्या है । पशु-प्रवृत्ति मानव के लिए निंदनीय क्यों है ?
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:15 · grounding rag
Model Answer
पशु-प्रवृत्ति वह स्वभाव है जिसमें प्राणी केवल अपने लिए जीता है — जैसे पशु चरागाह में केवल अपना हिस्सा चरकर लौट आते हैं। कवि के अनुसार — "वही पशु-प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे।"
यह प्रवृत्ति मानव के लिए निंदनीय है क्योंकि मनुष्य में चेतना-शक्ति होती है; वह दूसरों के हित का ध्यान रख सकता है। जो केवल अपने लिए जीता है, वह मनुष्य कहलाने योग्य नहीं।
Source: मनुष्यता (कविता), पाठ प्रवेश — chapter 3
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Explanation
- परीक्षक दो बातें देखते हैं: (1) पशु-प्रवृत्ति की सटीक परिभाषा और (2) निंदनीय होने का कारण।
- कविता की पंक्ति उद्धृत करना अंक दिलाता है।
- 'पाठ प्रवेश' से 'चेतना-शक्ति' वाला बिंदु जोड़ने पर उत्तर पूर्ण होता है।