लेखक के ग्रीष्मावकाश बिताने के तरीके:
पाठ के अनुसार लेखक छुट्टियों में ननिहाल जाकर दूध-दही-मक्खन खाते, नानी का प्यार पाते और तालाब में खूब नहाते थे। घर पर रहने पर तालाब के किनारे रेतीले टीले पर लोट-पोट करते, पानी में छलाँग लगाते और साथियों के साथ खूब खेल-कूद करते थे। छुट्टियों का काम अंतिम दिनों के लिए छोड़ देते और पिटाई के डर से योजनाएँ बनाते रहते थे।
अपने तरीकों से अंतर:
मेरी छुट्टियाँ लेखक से भिन्न हैं — मैं ट्यूशन और ऑनलाइन कक्षाओं में व्यस्त रहता/रहती हूँ। मोबाइल, टेलीविजन और इंटरनेट मेरे प्रमुख साथी हैं। तालाब में नहाने जैसी खुली प्रकृति में खेलने की जगह नहीं मिलती। परिवार पढ़ाई पर अधिक ध्यान देता है। ग्रामीण सरलता की जगह शहरी व्यस्तता ने ले ली है।
Source: सपनों के-से दिन, Chapter 2
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