जब टोपी ने खाने की मेज़ पर अपनी माँ को "अम्मी" कहकर बुलाया, तो घर के सभी लोगों के हाथ रुक गए और सबकी आँखें उस पर जम गईं। दादी सुभद्रादेवी ने क्रोध से पूछा कि यह शब्द उसने कहाँ सीखा। माँ रामदुलारी ने उसे खूब मारा और मुन्नी बाबू ने झूठा आरोप भी लगाया।
मेरे विचार में घरवालों की यह प्रतिक्रिया संकीर्ण मानसिकता और सांप्रदायिक पूर्वाग्रह को दर्शाती है। एक छोटे बच्चे के लिए "अम्मी" केवल एक प्यार भरा शब्द था, परंतु परिवार ने उसे धार्मिक सीमा उल्लंघन समझा। भाषा और रिश्ते धर्म से ऊपर होते हैं — यह बात टोपी समझता था, पर उसके घरवाले नहीं।
Source: टोपी शुक्ला, खंड 2