सेवा में,
संपादक महोदय,
दैनिक हिंदी समाचार-पत्र,
चेन्नई।
विषय: कोचिंग संस्थानों के बढ़ते माया-जाल के संबंध में।
महोदय,
आपके लोकप्रिय समाचार-पत्र के माध्यम से मैं एक ज्वलंत समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता/चाहती हूँ।
आजकल कोचिंग संस्थान एक व्यवसाय बन गए हैं। ये संस्थान भारी फीस वसूलकर विद्यार्थियों को सफलता की गारंटी देते हैं, किंतु वास्तव में अधिकांश छात्रों को निराशा ही मिलती है। इससे विद्यालयी शिक्षा की उपेक्षा हो रही है तथा बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है। निर्धन परिवारों के बच्चे महँगी कोचिंग न ले पाने के कारण पीछे रह जाते हैं।
अतः सरकार को इन संस्थानों के नियमन हेतु कठोर नीति बनानी चाहिए।
भवदीय/भवदीया,
देव/देवांशी
अ.ब.स. नगर, चेन्नई
दिनांक: XX/XX/XXXX
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