दुनिया कैसे वजूद में आई? पहले क्या थी? किस बिंदु से इसकी यात्रा शुरू हुई? इन प्रश्नों के उत्तर विज्ञान अपनी तरह से देता है, धार्मिक ग्रंथ अपनी-अपनी तरह से। संसार की रचना भले ही कैसे हुई हो लेकिन धरती किसी एक की नहीं है। पंछी, मानव, पशु, नदी, पर्वत, समंदर आदि की इसमें बराबर की हिस्सेदारी है। यह और बात है कि इस हिस्सेदारी में मानव जाति ने अपनी बुद्धि से बड़ी-बड़ी दीवारें खड़ी कर दी हैं। पहले पूरा संसार एक परिवार के समान था अब टुकड़ों में बँटकर एक-दूसरे से दूर हो चुका है। पहले बड़े-बड़े दालानों-आँगनों में सब मिल-जुलकर रहते थे अब छोटे-छोटे डिब्बे जैसे घरों में जीवन सिमटने लगा है। बढ़ती हुई आबादियों ने समंदर को पीछे सरकाना शुरू कर दिया है, पेड़ों को रास्तों से हटाना शुरू कर दिया है, फैलते हुए प्रदूषण ने पंछियों को बस्तियों से भगाना शुरू कर दिया है।
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए बहुविकल्पी प्रश्नों के उत्तर सर्वाधिक उचित विकल्प चुनकर दीजिए :
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:17 · grounding stimulus
Model Answer
(i) उत्तर : C — धरती सबकी साझी है
गद्यांश में कहा गया है कि धरती किसी एक की नहीं है — पंछी, मानव, पशु, नदी, पर्वत, समंदर आदि सबकी इसमें बराबर की हिस्सेदारी है।
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(ii) उत्तर : D — कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या है।
गद्यांश में स्पष्ट है कि पहले पूरा संसार एक परिवार जैसा था, जो 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना को ही दर्शाता है।
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(iii) उत्तर : A — एकल परिवारों में सिमटना
गद्यांश के अनुसार पहले बड़े-बड़े दालानों-आँगनों में सब मिल-जुलकर रहते थे, किंतु अब जीवन छोटे-छोटे डिब्बे जैसे घरों में सिमट गया है।
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(iv) उत्तर : A — समुद्र को धकेलना शुरू हुआ
गद्यांश में कहा गया है कि बढ़ती हुई आबादियों ने समंदर को पीछे सरकाना शुरू कर दिया है।
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(v) उत्तर : D — 1-III, 2-I, 3-II
- प्रदूषण ने → पक्षियों को बेघर किया (III)
- बढ़ती आबादी ने → पेड़ साफ़ कर दिए (I)
- परिवार की → परिभाषा बदल गई (II)
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Source: गद्यांश (अपठित गद्यांश)
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Explanation
- (i) गद्यांश की मूल भावना 'साझी धरती' है — यही केंद्रीय विचार है।
- (ii) कथन-कारण प्रश्न में देखें कि क्या कारण, कथन को तार्किक आधार देता है। यहाँ 'वसुधैव कुटुंबकम' = एक परिवार की भावना, इसलिए D सही है।
- (iii) 'छोटे-छोटे डिब्बे जैसे घर' = एकल परिवार की ओर संकेत।
- (iv) गद्यांश में सीधे लिखा है — समंदर को पीछे सरकाना।
- (v) सुमेलन के लिए गद्यांश की अंतिम पंक्तियाँ ध्यान से पढ़ें: प्रदूषण → पंछी, आबादी → पेड़, परिवार की परिभाषा बदली।