'गिन्नी का सोना' प्रसंग में शुद्ध सोने की तुलना व्यावहारिक आदर्शवाद से की गई है। शुद्ध सोना बहुत कोमल होता है, इसलिए उसमें थोड़ा तांबा मिलाकर गिन्नी बनाई जाती है। इसी प्रकार महात्मा गांधी जैसे आदर्शवादी लोग व्यावहारिकता को भी अपनाते हैं, जिससे उनके आदर्श समाज में टिकाऊ और उपयोगी बनते हैं।
Source: पतझर में टूटी पत्तियाँ, Chapter 13
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