(I) पृथ्वी होगी तभी यहाँ जीवन होगा...
पृथ्वी हमारी माँ है। यह हमें जल, वायु, भोजन और आश्रय देती है। किंतु आज मनुष्य की लापरवाही से वायु, जल और भूमि — तीनों प्रदूषित हो रहे हैं। कारखानों का धुआँ, प्लास्टिक का कचरा और रासायनिक पदार्थ पृथ्वी को बीमार बना रहे हैं।
यदि धरती ही नष्ट हो गई तो जीवन कहाँ बचेगा? इसलिए हमें पेड़-पौधे लगाने चाहिए, प्लास्टिक का उपयोग बंद करना चाहिए और जल का अपव्यय रोकना चाहिए।
"धरा बचाओ, जीवन चमकाओ" — यह केवल नारा नहीं, हमारी ज़िम्मेदारी है। प्रदूषण रहित पृथ्वी ही स्वस्थ और सुखी जीवन की नींव है। आइए, हम सब मिलकर पृथ्वी को बचाने का संकल्प लें।
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(II) परीक्षा देने के बाद...
परीक्षा देने के बाद जो राहत और खुशी मिलती है, वह अवर्णनीय होती है। जब प्रश्न-पत्र अनुकूल होता है तो मन प्रसन्नता से भर जाता है। परीक्षा कक्ष से बाहर निकलते ही सभी मित्र एक-दूसरे से प्रश्नों के उत्तर मिलाने लगते हैं।
"तुमने चौथे प्रश्न का क्या उत्तर लिखा?" — ऐसी बातचीत में घंटों बीत जाते हैं। किसी के चेहरे पर संतोष होता है, किसी के मन में थोड़ी चिंता। परंतु जब अंतिम परीक्षा समाप्त होती है, तब तो मानो पंख लग जाते हैं।
परीक्षा समाप्ति का यह आनंद अनूठा होता है। अब न रात को पढ़ने की चिंता, न सुबह जल्दी उठने की बाध्यता। यह अनुभव हर विद्यार्थी के जीवन की मधुर स्मृति बन जाता है।
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(III) लोकतंत्र में मतदान
लोकतंत्र का अर्थ है — जनता का, जनता के लिए, जनता द्वारा शासन। इस व्यवस्था की आधारशिला है — मतदान। मत देकर ही नागरिक अपना प्रतिनिधि चुनते हैं और सरकार बनाते हैं।
मतदान करना प्रत्येक वयस्क नागरिक का अधिकार भी है और कर्तव्य भी। यदि नागरिक मतदान न करें तो अयोग्य व्यक्ति सत्ता में आ सकते हैं। इसलिए मतदान से विमुख रहना लोकतंत्र को कमज़ोर करना है।
एक समझदार मतदाता जाति, धर्म या लालच में नहीं आता। वह उम्मीदवार की योग्यता और नीतियाँ देखकर वोट देता है। ऐसा सजग मतदाता ही देश को सही दिशा दे सकता है। अतः "वोट दो, देश बनाओ" — यह हमारा राष्ट्रीय दायित्व है।