'दरअसल कितनी भी बड़ी हो तोप / एक दिन तो होना ही है उसका मुँह बंद' 'तोप' कविता से उद्धृत इन पंक्तियों का प्रतीकार्थ स्पष्ट कीजिए ।
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:18 · grounding rag
Model Answer
इन पंक्तियों में तोप अत्याचार, दमन और साम्राज्यवादी शक्ति का प्रतीक है। कवि कहता है कि चाहे कोई शक्ति कितनी भी बड़ी और विनाशकारी क्यों न हो, एक दिन उसका अंत अवश्य होता है। अर्थात् अन्याय और अहंकार की शक्ति शाश्वत नहीं होती — समय के साथ वह निष्क्रिय हो जाती है।
Source: तोप (वीरेंद्र डंगवाल), प्रश्न-अभ्यास (ख)
---
Explanation
- परीक्षक प्रतीकार्थ माँग रहा है, इसलिए केवल शाब्दिक अर्थ पर्याप्त नहीं — तोप = दमनकारी शक्ति, मुँह बंद = उसका अंत/निष्क्रियता, यह जोड़ना अनिवार्य है।
- चिड़ियों द्वारा गपशप करना और बच्चों की घुड़सवारी — ये सब मिलकर यही सिद्ध करते हैं कि शक्ति का अहंकार अस्थायी होता है।
- उत्तर संक्षिप्त किन्तु पूर्ण रखें; 2 अंक में एक-दो वाक्य में प्रतीक बताना और निहितार्थ देना पर्याप्त है।