जीवन का सच्चा सुख संतोष में
संतोष का अर्थ है अपनी वर्तमान स्थिति में प्रसन्न रहना। जो व्यक्ति संतुष्ट रहता है, वही सच्चे सुख का अनुभव करता है। कहा भी गया है — "संतोषम परम सुखम" अर्थात संतोष ही परम सुख है।
आज के युग में मनुष्य की इच्छाएँ असीमित हो गई हैं। एक इच्छा पूरी होते ही दूसरी जन्म लेती है। इन अनंत इच्छाओं के पीछे भागने से न शांति मिलती है, न सुख। यदि हम अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखें, तो मन शांत रहेगा।
सुखी जीवन का आधार धन-संपत्ति नहीं, बल्कि मन की संतुष्टि है। जो व्यक्ति थोड़े में भी प्रसन्न रहना सीख लेता है, वही जीवन में सच्चा सुख पाता है। अतः संतोष अपनाएँ और सुखी रहें।
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