'कर चले हम फिदा' कविता से उद्धृत – 'साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई' – पंक्ति के संदर्भ में सैनिक जीवन की कठिनाइयों का उल्लेख कीजिए ।
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Model Answer
'साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई' पंक्ति में सैनिकों की अत्यंत विषम परिस्थितियों का चित्रण है। हिमालय की बर्फीली चोटियों पर लड़ते हुए सैनिकों की नाड़ी (नब्ज़) ठंड से जम रही थी और साँस रुकने लगी थी। अर्थात् वे मृत्यु के कगार पर थे। फिर भी उन्होंने अपने कदम नहीं रोके। सिर कट जाने की परवाह न कर हिमालय का सिर झुकने नहीं दिया। यह पंक्ति सैनिक जीवन की शारीरिक पीड़ा, कठोर मौसम और मृत्यु-भय को पार कर देशरक्षा की अदम्य भावना को व्यक्त करती है।
Source: कर चले हम फ़िदा, Chapter 6
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Explanation
- Examiner expects: (1) पंक्ति का अर्थ/संदर्भ (बर्फीला वातावरण, मृत्यु का भय), (2) सैनिकों की कठिनाइयाँ (ठंड, घाव, जानलेवा हालात), (3) इन सबके बावजूद अडिग रहने का भाव।
- 'नब्ज़ = नाड़ी' का अर्थ लिखना अच्छा impression देता है।
- उत्तर कविता की पंक्तियों ('बढ़ते कदम को न रुकने दिया', 'कट गए सर') से जोड़ें।