परहित सरिस धर्म नहि भाई
अर्थ: इस उक्ति का अर्थ है कि दूसरों की भलाई करने के समान कोई धर्म नहीं है। परोपकार ही सबसे बड़ा धर्म है।
जीवन की सार्थकता: मनुष्य का जन्म तभी सफल होता है जब वह दूसरों के काम आए। रंतिदेव, दधीचि और कर्ण जैसे महापुरुषों ने अपना सर्वस्व परोपकार में लगाया। जो व्यक्ति केवल अपने लिए जीता है, उसका जीवन निरर्थक है। दूसरों की सेवा करना ही मानव जीवन का सच्चा उद्देश्य है।
आनंद का स्रोत: परोपकार में ही सच्चा सुख और आनंद निहित है। जब हम किसी दुखी की सहायता करते हैं तो हृदय में अपूर्व संतोष मिलता है। यही आनंद धन-संपत्ति से नहीं मिल सकता। इसीलिए परहित को सर्वश्रेष्ठ धर्म कहा गया है।