सबसे बड़ा खजाना
रमेश एक धनी व्यापारी का बेटा था। उसे हमेशा लगता था कि सोना-चाँदी और पैसा ही सबसे बड़ा खजाना है।
एक बार वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। डॉक्टरों ने जवाब दे दिया। तब उसके बूढ़े पिता ने रात-दिन उसकी सेवा की, पड़ोसियों ने खाना पहुँचाया और मित्रों ने हिम्मत बँधाई। धीरे-धीरे रमेश स्वस्थ हो गया।
ठीक होने पर रमेश ने अपने पिता से कहा, "पिताजी, मैं गलत था। यह धन-दौलत नहीं, बल्कि आपका प्यार, मित्रों का साथ और अच्छा स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा खजाना है।"
पिता मुस्कुराए और बोले, "बेटा, यही सच्ची समझ है।"
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