निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत-बिंदुओं के आधार पर लगभग 100 शब्दों में अनुच्छेद लिखिए :
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:25 · grounding rag
Model Answer
(विकल्प ग चुना गया)
दैव-दैव आलसी पुकारा
'दैव-दैव आलसी पुकारा' — यह कथन गोस्वामी तुलसीदास की पंक्ति है, जिसका अर्थ है कि आलसी व्यक्ति अपनी असफलता का दोष भाग्य पर मढ़ देता है। वह परिश्रम करने की बजाय भाग्यवादी बन जाता है।
आलस्य मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। यह प्रतिभा और समय दोनों को नष्ट कर देता है। आलसी व्यक्ति न स्वयं का भला कर सकता है, न समाज का।
सफलता का एकमात्र मार्ग कर्म है। महापुरुषों ने कठोर परिश्रम से ही ऊँचाइयाँ प्राप्त कीं। जो व्यक्ति निरंतर प्रयत्नशील रहता है, भाग्य भी उसका साथ देता है। अतः हमें आलस्य त्यागकर कर्मरत रहना चाहिए।
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Explanation
- इस प्रश्न में तीन विकल्पों में से एक ही लिखना था — परीक्षा में भी एक ही चुनें।
- अनुच्छेद में तीनों संकेत-बिंदुओं को क्रमशः छुआ जाना आवश्यक है: कथन का अर्थ → आलस्य शत्रु → कर्म से सफलता।
- भाषा सरल, प्रवाहमयी और लगभग 100 शब्दों की हो।
- उद्धरण या सूक्ति देने से प्रभाव बढ़ता है — यहाँ तुलसीदास का संदर्भ उचित है।
- अंक: विचारों की स्पष्टता (2) + भाषा-शुद्धता (2) + प्रस्तुति/संगठन (1) = 5 अंक।