'पशु पर्व' में तताँरा और वामीरो दोनों एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे, किंतु वे अलग-अलग गाँवों के थे। उनके गाँव की रीति थी कि विवाह केवल अपने ही गाँव में होगा। पर्व में वामीरो की माँ ने तताँरा को वामीरो के साथ देखा और उसे अपमानित किया। समाज और परिजनों ने भी उसका उपहास किया। वामीरो को उससे दूर किया जाने लगा। यह सब देखकर तताँरा असहाय और पीड़ित हो गया और अंततः क्रोधित होकर उसने अपनी तलवार धरती में घोंप दी।
Source: तताँरा-वामीरो कथा, Chapter 10
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