खेलों में रुचि होते हुए भी बड़े भाई साहब अपने शौक को पूरा क्यों नहीं कर पाते थे ?
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Model Answer
बड़े भाई साहब को खेलों में गहरी रुचि थी, लेकिन वे अपना यह शौक पूरा नहीं कर पाते थे क्योंकि उन पर छोटे भाई की निगरानी और रक्षा का उत्तरदायित्व था। वे सोचते थे कि यदि वे स्वयं बेराह चलेंगे, तो छोटे भाई को सही राह कैसे दिखाएँगे। उन्होंने स्वयं कहा— "मेरा भी जी ललचाता है, लेकिन करूँ क्या, खुद बेराह चलूँ तो तुम्हारी रक्षा कैसे करूँ? यह कर्तव्य भी तो मेरे सिर है।" इस प्रकार बड़े भाई साहब ने अपने कर्तव्य को शौक से ऊपर रखा।
Source: बड़े भाई साहब, अध्याय 8
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Explanation
- परीक्षक यहाँ यह देखते हैं कि छात्र कारण स्पष्ट रूप से बताए — कर्तव्य-बोध और आदर्श बनाए रखने की ज़िम्मेदारी।
- पाठ से उद्धरण देना उत्तर को पुष्ट करता है; यह 3-mark प्रश्न में सराहनीय होता है।
- मुख्य बिंदु: भाई साहब को क्रिकेट, हॉकी, मेले-तमाशे सभी में रुचि थी, पर वे जानते थे कि यदि वे स्वयं खेलने लगे तो छोटे भाई पर उनका नैतिक अधिकार समाप्त हो जाएगा।