'साखी' पाठ के आधार पर 'घर' की प्रतीकात्मकता स्पष्ट करते हुए लिखिए कि कबीर अपने बताए मार्ग पर चलने वालों का घर क्यों जलाना चाहते हैं ?
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Model Answer
'साखी' में कबीर ने 'घर' को मोह-माया, अहंकार और सांसारिक आसक्ति का प्रतीक माना है। यह वह 'घर' नहीं जहाँ हम रहते हैं, बल्कि मन का वह कोना है जहाँ लोभ, ममता और अहंकार का वास होता है।
कबीर चाहते हैं कि उनके मार्ग पर चलने वाला साधक इन विकारों को पूरी तरह नष्ट कर दे — अर्थात् भीतरी मोह-माया रूपी 'घर' को जला दे। जब तक यह घर (अहंकार व आसक्ति) जीवित है, तब तक ईश्वर की प्राप्ति संभव नहीं। इसीलिए कबीर कहते हैं — जो मेरे साथ चलना चाहे, वह अपना यह घर (मोह का बंधन) जलाकर चले।
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Explanation
- 'घर' = मोह-माया, अहंकार — यही प्रतीकार्थ परीक्षक देखते हैं।
- उत्तर में दो बातें स्पष्ट होनी चाहिए: (1) घर की प्रतीकात्मकता, (2) कबीर क्यों इसे जलाना चाहते हैं।
- 'साखी' अध्याय 1 की मुख्य थीम — वैराग्य, निर्मोह और ईश्वर-प्रेम — को उत्तर में दर्शाएँ।
- सीधे और सरल हिंदी में लिखें; उद्धरण दें तो साखी की पंक्ति जोड़ सकते हैं (जैसे "जो घर जारे आपना चलै हमारे साथ")।