संगति का फल
एक गाँव में दो मित्र रहते थे — राम और श्याम। राम परिश्रमी और अच्छे विद्यार्थियों के साथ रहता था, जबकि श्याम आलसी और बुरे लड़कों की संगति में पड़ गया।
धीरे-धीरे श्याम पढ़ाई छोड़कर चोरी और झूठ बोलने लगा। एक दिन उसे पुलिस ने पकड़ लिया और उसके माता-पिता को बहुत शर्मिंदगी उठानी पड़ी।
दूसरी ओर राम ने अच्छी संगति के कारण खूब मेहनत की और परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया। सभी ने उसकी प्रशंसा की।
शिक्षा: जैसी संगति, वैसा फल। अच्छी संगति जीवन सँवारती है और बुरी संगति बर्बाद करती है।
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