कभी-कभी सहज से तेज़ गति में परिवर्तित होते क्रोध को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो उसके परिणाम अत्यंत घातक और पश्चात्ताप के भाव जगाने वाले हो सकते हैं । कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी के मनोविश्लेषक टॉम जी. स्टीवेन्स ने अपनी किताब 'ओवरकम एंगर ऐंड एग्रेसन' में स्पष्ट किया है कि क्रोध-नियंत्रण का एक प्रमुख तरीका यह है कि स्थिति को अपने नहीं, दूसरों के नजरिये से देखें । दूसरों को उन स्थितियों पर प्रकाश डालने के लिए प्रोत्साहित करें, क्षमा करना सीखें, बीते को बिसारने की आदत विकसित करें और किसी को चोट पहुँचाने के बजाय प्रशंसा से उसका मूल्यांकन करें । याद रखें, क्रोध-नियंत्रण से आप स्वयं को शक्तिशाली बनाते हैं । इससे आपकी खुशहाली और स्मृतियों का विस्तार होता है । यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी के वैज्ञानिकों ने अपनी किताब 50 साइंस ऑफ मेंटल इलनेस में इन कमजोरियों पर प्रकाश डालते हुए गुस्से को काबू में रखने के कारगर सूत्र दिए हैं । क्रोध-नियंत्रण से हम अपना ही नहीं, दूसरों के उजड़ते संसार को फिर से आबाद कर सकते हैं क्योंकि शांत मन सृजन में समर्थ होता है । हमारे सृजनात्मक होने से ही मानवता का हित सध सकता है । तो जब भी क्रोध आए, इन उपायों को आजमाएँ । जीवन में बिखरी हुई चीजों को सँवारने की ओर कदम खुद बढ़ चलेंगे ।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर इस पर आधारित प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
Generated by claude-sonnet-4-6 · 2026-06-15 10:16 · grounding stimulus
Model Answer
(i) (c) इससे व्यक्ति की विस्मृतियों का विस्तार होता है ।
(गद्यांश में 'स्मृतियों का विस्तार' कहा गया है, 'विस्मृतियों का' नहीं — अतः यह कथन अनुपयुक्त है।)
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(ii) (a) अत्यंत आवेग में किया गया क्रोध
(सहज से तेज़ गति में परिवर्तित होने वाला — अर्थात् आवेग में आया — क्रोध नियंत्रित न हो तो पश्चात्ताप का कारण बनता है।)
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(iii) (d) परिस्थितियों को दूसरों के नजरिये से जानने का प्रयास करना ।
(स्टीवेन्स ने स्पष्ट कहा — "स्थिति को अपने नहीं, दूसरों के नजरिये से देखें।")
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(iv) (c) संयमित रहने का प्रयत्न
(गद्यांश में क्रोध आने पर उपाय आजमाकर संयम बनाए रखने की सलाह दी गई है।)
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(v) (d) कथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) उसकी सही व्याख्या नहीं है ।
(कथन सही है — शांत मन सृजन में समर्थ होता है, अतः क्रोध सृजन का संहारक है। किंतु कारण में क्षमाशीलता की बात है जो सृजन-संहार की सीधी व्याख्या नहीं करती।)
Source: उपर्युक्त गद्यांश (क्रोध-नियंत्रण)
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Explanation
- (i) में शब्द-भेद पर ध्यान दें: 'स्मृति' (memory) और 'विस्मृति' (forgetting) — परीक्षा में ऐसे सूक्ष्म अंतर पूछे जाते हैं।
- (ii) 'सहज से तेज़ गति में परिवर्तित होना' = आवेग (impulse) — यही अनियंत्रित क्रोध है।
- (iii) स्टीवेन्स का मूल सूत्र सीधे गद्यांश में है; option (c) "अपने नजरिये से" कहता है जो विपरीत है।
- (iv) गद्यांश 'उपायों को आजमाने' की बात करता है — अर्थात् संयम।
- (v) कथन-कारण प्रश्न में जाँचें कि कारण, कथन की सही व्याख्या करता है या नहीं — यहाँ क्षमाशीलता सृजन की नहीं, क्रोध-नियंत्रण की विशेषता है।