जहाँ चाह, वहाँ राह
रमेश एक गरीब किसान का बेटा था। उसके पाँव में जन्म से विकलांगता थी, फिर भी उसने डॉक्टर बनने का सपना देखा। गाँव के लोग उसका मज़ाक उड़ाते — "लँगड़ा क्या डॉक्टर बनेगा!"
लेकिन रमेश ने हार नहीं मानी। वह बैसाखी के सहारे स्कूल जाता, रात को दीपक की रोशनी में पढ़ता। उसकी लगन देखकर एक शिक्षक ने उसे छात्रवृत्ति दिलाई।
वर्षों की कठोर मेहनत के बाद रमेश ने मेडिकल परीक्षा उत्तीर्ण की और डॉक्टर बन गया। अब वह उसी गाँव में निःशुल्क इलाज करता है।
सीख: सच्ची लगन और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।
---