एक वीर सिपाही का सपना
रमेश एक साधारण गाँव का लड़का था, लेकिन उसके सपने बड़े थे। बचपन से ही वह सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहता था।
कड़ी मेहनत और लगन से उसने शारीरिक प्रशिक्षण किया। गर्मी हो या सर्दी, वह हर दिन सुबह पाँच बजे उठकर दौड़ लगाता था। माँ कहती, "बेटा, इतनी मेहनत क्यों?" रमेश मुस्कुराकर कहता, "माँ, देश की रक्षा करना मेरा सपना है।"
अंततः उसका चयन सेना में हो गया। सीमा पर तैनात होकर उसने अपने देश की रक्षा की। एक बार शत्रु के हमले में वह घायल हो गया, फिर भी उसने मोर्चा नहीं छोड़ा।
उसकी वीरता देखकर देश को गर्व हुआ। रमेश का सपना साकार हो चुका था — वह सच्चा वीर सिपाही बन गया था।
---